यूपीए सरकार द्वारा 2009 में किसानों के कृषि कर्ज माफी योजना में घोटाले की जिम्मेदारी अब बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ, खातों की जांच करने वाले ऑडीटरों पर भी पड़ने जा रही है।
इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने गड़बड़ी वाले खातों को क्लीन चिट देने वाले ऑडिटरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें उनसे यह पूछा गया है कि उन्होंने किस आधार पर इस तरह के खातों को क्लीन चिट दी है।
भारत के महालेखा नियंत्रक एवं परीक्षक (कैग) ने कृषि कर्ज माफी योजना के तहत अपनी रिपोर्ट में करीब 52 हजार करोड़ रुपए के घोटाले की आशंका जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया है कि जांचे गए करीब 90 हजार खातों में से 22 फीसदी खातों में नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके चलते कई पात्र किसान कर्ज माफी का लाभ नहीं उठा सके।
स्कीम के तहत 3.73 करोड़ किसानों को लाभ मिला है। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देश के बाद जांच के जो मामले सामने आए हैं, उसमें बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ खातों की ऑडिट करने वाले आडिटरों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट की संस्था आईसीएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से इस बात की पुष्टि की है कि ऑडीटरों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं।
अधिकारी के अनुसार अभी पूरे मामले की जांच वित्त मंत्रालय कर रहा है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हम आडीटरों पर कोई कार्रवाई करने पर विचार कर सकते हैं।
वित्त मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार अभी तक की जांच से यह बात सामने आई है कि कई मामलों में गड़बड़ियां हुई हैं।
हालांकि स्कीम के आकार को देखते हुए यह संख्या बहुत कम है। पर लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार पात्र किसानों को कर्ज माफी का लाभ न मिलने के अलावा अधिकारियों की मिलीभगत से कारोबार आदि के लिए कर्ज को भी माफी स्कीम में शामिल कर लिया गया था। साथ ही ऐसे किसानों को भी इस का लाभ मिला, जो कि स्कीम के लिए पात्र ही नहीं थे।
इसके पहले वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद में बताया था कि आरबीआई और नाबार्ड पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
आरबीआई को अभी तक 56,322 मामलों में गड़बड़ी मिली है। इसी तरह नाबार्ड को 2,80,194 मामलों में गड़बड़ियां मिली हैं। इसमें कुल 230 करोड़ रुपए के गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं।