केंद्र सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 1.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है, लेकिन इस बढ़ोतरी का असर फिलहाल उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
पिछले कुछ महीने में इंडियन बास्केट कच्चे तेल के प्रति बैरल दाम घटकर 78 डॉलर के करीब आ गए हैं। इसलिए घरेलू बाजार में डीजल और पेट्रोल की कीमतें भी घटी हैं।
अगले पखवाड़े से डीजल-पेट्रोल के फिर से एक से दो रुपये प्रति लीटर सस्ता होने की अटकलें थीं। लेकिन इसी दौरान वित्त मंत्रालय ने इन दोनों ईंधनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 1.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी। इस पर यदि सेस को भी जोड़ दें तो प्रति लीटर 1.55 रुपये की बढ़ोतरी बैठती है।
उत्पाद शुल्क बढ़ने के बाद जब इंडियन ऑयल के अध्यक्ष बी. अशोक से दाम बढ़ाने के बारे में सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि फिलहाल कंपनी इसे खुद वहन करेगी। अगले पखवाड़े में देखा जाएगा कि क्या करना है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की अध्यक्ष निशि बासुदेव ने भी इसी तरह की राय जाहिर की। यानी, कंपनियां वेट एंड वाच के मूड में हैं।
वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि इस फैसले से सरकार को पांच से छह हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। वित्त वर्ष 2014-15 खत्म होने में अभी करीब पांच महीने हैं और देश में इस समय पेट्रोल एवं डीजल की खपत में बढ़ोतरी का रुख है।
पिछले छह महीने के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान पेट्रोल की खपत में जहां 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं डीजल की खपत में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे केंद्रीय उत्पाद शुल्क के मद में वसूली संतोषजनक हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अप्रैल से अक्तूबर के बीच उत्पाद शुल्क के मद में नकारात्मक वृद्धि दर देखने को मिलता है।