बढ़ती महंगाई के बीच कम कीमत में इलाज के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अस्पतालों को भले ही सरकार रियायती और सुलभ बता रही हो। लेकिन सच्चाई यह है कि देश के कुल 151 ईएसआई अस्पतालों में हजारों की संख्या में डॉक्टर और नर्स की कमी है।
श्रम मंत्रालय ने माना है कि ईएसआई अस्पतालों में करीब दो हजार डॉक्टर और पांच हजार से अधिक पराचिकित्सकों का अभाव है। इस वजह से मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है।
मंत्रालय के मुताबिक उत्तर प्रदेश के ईएसआई अस्पतालों में 230 चिकित्सकों की रिक्तियां हैं। वहीं हरियाणा में 56 और पंजाब में 37 पद खाली हैं। मंत्रालय का कहना है कि निजी अस्पतालों के मुकाबले कम तनख्वाह पर डॉक्टर अपनी सेवा देने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि ईएसआई अस्पतालों की घटती लोकप्रियता से भी रिक्त पदों को भरने में दिक्कत आ रही है।
हालांकि श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि सरकार ईएसआई अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं बहाल कर आम आदमी को ईलाज के लिए बेहतर विकल्प देना चाहती है। इसलिए भविष्य में दर्जनों नए ईएसआई अस्पताल खोलने का खाका भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कई राज्यों में अस्पतालों के लिए भूमि अधिग्रहण का काम किया जा रहा है। राज्यों में ढांचागत व्यवस्था होने के बाद इसका परिचालन संभव हो सकेगा। श्रम मंत्रालय के मुताबिक उत्तराखंड के लिए प्रस्तावित ईएसआई अस्पतालों को देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और काशीपुर में खोला जाएगा।
इसके अलावा तमिलनाडू में तीन, छत्तीसगढ़ में तीन, उड़ीसा में दो, कर्नाटन में दो, पश्चिम बंगाल में दो पंजाब, राजस्थान और गुजरात में एक-एक ईएसआई अस्पताल खोलने का प्रस्ताव है।