अब 2,000 से कम आबादी वाले क्षेत्रों में भी लोगों को बैंकिंग सेवाएं मिलेंगी। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देश के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों के लिए ऐसे आबादी वाले क्षेत्रों में भी बैंकिंग कॉरस्पाडेंट के जरिए अपनी सेवाएं देना जरूरी होगा। सरकार इस कदम के जरिए साल 2014 की शुरुआत में देश के सभी क्षेत्रों में नकद सब्सिडी (डायरेक्टर बेनेफिट ट्रांसफर) पहुंचाने की अपनी योजना को पूरा करना चाह रही है।
अभी सामान्य क्षेत्रों में बैंकों को दो हजार या उससे से ज्यादा आबादी वाले और पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में 1,000 और उससे ज्यादा की आबादी वाले क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं (स्वाभिमान अभियान के तहत) देना जरूरी था। नए निर्देश के बाद देश के सभी क्षेत्र अब बिजनेस कॉरस्पाडेंट और वित्तीय समावेशन की योजनाओं के जरिए बैंकिंग सेवा के दायरे में आ सकेंगे।
वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नकद सब्सिडी स्कीम को पूरे देश में साल 2014 की शुरुआत में लागू किया जाना है। ऐसे में यह जरूरी है कि सब्सिडी देने के लिए उस समय तक देश के सभी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं देने के लिए पूरा आधारभूत ढांचा तैयार कर लिया जाए।
वित्त मंत्रालय अभी तक आबादी के आधार पर क्षेत्रों को बैंकिंग सेवाओं में लाने के लक्ष्य तय कर रहा था। इसके तहत बैंकों को ऐसे क्षेत्र, जिनकी आबादी 2,000 या उससे ज्यादा है और वहां बैंकिंग सेवाएं नहीं है, में बिजनेस कॉरस्पाडेंट के जरिए बैंकिंग सेवाएं पहुंचानी थीं। अधिकारी के अनुसार नए नियमों के बाद बैंक उन सभी क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगे जहां अभी बैंकिंग सेवाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
इसके पहले वित्त मंत्रालय बैंकों को बिजनेस कॉरस्पांडेट रखने के नियमों में भी छूट दे चुका है। बैंक अब अपनी जरूरत के मुताबिक खुद या निजी कंपनियों के जरिए यह सेवाएं दे सकेंगे। सरकार एक जनवरी 2013 से देश के 20 जिलों में नकद सब्सिडी स्कीम को छात्रवृत्ति आदि योजनाओं के लिए ही लागू कर पाई थी।
अभी भी सरकार नकद सब्सिडी के तहत उर्वरक, खाद्य, केरोसिन आदि सब्सिडी लाभार्थी के बैंक खातों में देना शुरू नहीं कर पाई है। इसे देखते हुए सरकार की कोशिश है कि दिसंबर 2013 तक बैंक सभी जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार कर लिया जाए।