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ऊर्जा क्षेत्र को ऊर्जा सुरक्षा नीति की जरूरत

Mon, 16 Jun 2014 04:21 PM IST
नई दिल्ली
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टाटा पावर निजी क्षेत्र की देश की अग्रणी बिजली उत्पादक कंपनी है और कंपनी ने विंड और सोलर एनर्जी में बड़े पैमाने पर कारोबार को डायवर्सीफाई किया है। टाटा पावर ने कारोबारी संभावनाओं की तलाश में विदेश के बाजारों में भी प्रवेश किया है और मौजूदा समय में कंपनी अफ्रीका और जार्जिया जैसे देशों में ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाएं संचालित कर रही है। सुजाय मेहदूदिया ने टाटा पावर के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना से कंपनी के विजन और भविष्य के बारे में बात की है।
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सवाल - ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई परियोजनाओं को लेकर टाटा पावर की क्या योजनाएं हैं?

मौजूदा समय में हमारे पास थर्मल, ग्रीन और वेस्ट गैसेज ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से 8,585 मेगावॉट की क्षमता है। टाटा पावर कई पावर प्रोजेक्टों पर काम कर रहा है। इन प्रोजेक्टों के पूरा होने पर उम्मीद है कि कंपनी की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 849.2 मेगावॉट तक बढ़ जाएगी। कंपनी सोलर, विंड, हाइड्रो और गैस आधारित आठ परियोजनाओं पर भारत और विदेश में काम कर रही है। टाटा पावर ने टाटा पावर रेन्यूवेबल एनर्जी लिमिटेड (टीपीआरइएल) के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया है। इसके तहत महाराष्ट्र के आंभेरी स्थित विंड एनर्जी प्रोजेक्ट से 32 मेगावॉट विंड एनर्जी खरीदी जाएगी। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट 2014-15 तक उत्पादन शुरू कर देगा। कंपनी ने टीपीआरइएल के साथ 49.5 मेगावॉट विंड एनर्जी प्रोजेक्ट से ऊर्जा खरीदने के लिए पीपीए किया है। दक्षिण अफ्रीका में 94.8 मेगावॉट विंड पावर जेनेरेशन प्रोजेक्ट पर मौजूदा समय में काम चल रहा है। दक्षिण अफ्रीका में ही अमाखाला एमोयेनी 134.4 मेगावॉट विंड पावर जेनरेशन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। टाटा पावर ने टीपीआरइएल के माध्यम से 25 मेगावॉट सोलर फोटोवोल्टायिक (पीवी) पावर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक शुरू किया है। डागाचू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट एक संयुक्त उपक्रम है। संयुक्त उपक्रम में टाटा पावर की हिस्सेदारी 26 फीसदी है।

सवाल - मौजूदा वर्ष के लिए क्या प्राथमिकताएं हैं?

टाटा पावर भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है। कंपनी की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 8,585 मेगावॉट है। कंपनी का लक्ष्य 2022 तक उत्पादन बढ़ा कर 18,000 मेगावॉट, डिस्ट्रीब्यूशन 4,000 मेगावॉट 50 एमटीपीए ईंधन स्रोत सुरक्षित करना है। इसके लिए कई परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
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सवाल - मुंद्रा के संबंध में सीइआरसी के आदेश को कई भागीदारों ने चुनौती दी है। इसके परिणामस्वरूप टैरिफ के मोेर्चे पर राहत के लिए इंतजार करना होगा। इस बारे में टाटा पावर की क्या योजना है?

21 फरवरी, 2014 को सीइआरसी के आदेश के बाद एक बेहद प्रतिस्पर्धी 4,000 मेगावॉट अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट बिजली उत्पाद जारी रखेगा। यह उपभोक्ताओं के लिए लाभदायक है। यह आदेश उपभोक्ताओं के लिए बेहतर है। इससे उपभोक्ताओं को मुंद्रा यूएमपीपी से भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी बिजली मिलती रहेगी। टाटा पावर मुंद्रा यूएमपीपी गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और राजस्थान को बिजली की आपूर्ति करता है। मुद्रा यूएमपीपी कंपेनसेटरी टैरिफ के साथ अब भी 287 प्रति यूनिट पर बेहद प्रतिस्पर्धी है।

हम समझते हैं कि टाटा पावर प्लांट के आसपास के समुदायों के विकास के लिए बहु आयामी रणनीति के साथ काम करता है। इसके बारे में बताएं?

टाटा ग्रप द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत किए जा रहे काम इसके संस्थापकों की विरासत है। टाटा पावर ने कई कम्युनिटी इनीशिएटिव शुरू की है और इसके लिए डेडीकेटेड कम्युनिटी रिलेशंस (सीआर) डिपार्टमेंट बनाया गया है। मौजूदा समय में सीआर इनीशिएटिव विलेज डेवलपमेंट एडवाइजरी काउंसिल बना कर्र रूफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर, वैल्यू चेन एनालिसिस, खेती का सीजन शुरू होने के समय रिवाल्विंग फंड बना कर लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।

सवाल - भारत के ऊर्जा क्षेत्र के सामने क्या चुनौतियां हैं?

देश का ऊर्जा क्षेत्र आजकल कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। 1.24 अरब आबादी वाले देश में बिजली की मांग 2017 तक 335 जीडब्लू तक पहुंज जाने की उम्मीद है। हालांकि इस मांग को पूरा करना आसान नहीं होगा। इसका कारण ईंधन की मांग और आपूर्ति में अंतर है। इसकी वजह से बिजली का उत्पादन भी मांग के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। फरवरी, 2014 तक भारत 5,378 मेगावॉट बिजली की कमी से जूझ रहा था। 335 जीडब्लू बिजली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को लगभग 440 जीडब्लू उत्पादन क्षमता की जरूरत होगी। इसका मतलब है कि हमें सालाना 20 से 40 जीडब्लू बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ानी होगी। इस उत्पादन क्षमता को बनाए रखना भी एक चुनौती होगी। भारत में कोयले का बड़ा भंडार होने के बावजूद घरेलू ऊर्जा क्षेत्र कोयले की कमी का सामना कर रहा और कोयले की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऊर्जा क्षेत्र के सामने एक और चुनौती भारत मेें प्राकृतिक गैस की कमी को लेकर है। गैस की की कमी के कारण गैस आधारित पावर प्रोजेक्ट में उत्पादन नहीं शुरू हो पा रहा है। ऐसे में देश में एक ऊर्जा सुरक्षा नीति बनाए जाने की जरूरत है, जिससे राज्य नियामकीय आयोगों को बल्क सप्लाई प्रोक्योरमेंट की योजना बनाने को लेकर गाइडेंस दिया जा सके।

सवाल- आपकी नजर में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी अन्य प्रमुख चुनौतियां क्या हैं क्योंकि एसइबी और डिस्कॉम भारी नुकसान में हैं?

ईंधन के अलावा डिस्ट्रीब्यूशन रिफार्म की धीमी गति एक अहम चिंता हे। पावर डिस्ट्रीब्यूशन ऐसा सेगमेंट है जहां तुरंत नीतिगत सुधारों और टैरिफ बढ़ाने की जरूरत है। डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट 20 करोड़ उपभोक्ताओं को 400 जीडब्लू लोड के साथ बिजली मुहैया कराता है। इसके अलावा डिस्कॉम को हो रहे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान के कारण न सिर्फ बिजली वितरण में बाधा आ रही है, बल्कि इससे भारत में बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर भी सवालिया निशान लग रहा है। इसके अलावा पावर सेक्टर की ग्रोथ के लिए जरूरी है कि राज्य मंजूरी देने और भूमि अधिग्रहण में डेवलपर्स का समर्थन करें। राज्यों के सहयोग के बिना डेवलपर्स के लिए अपनी निवेश योजना पर अमल करना मुश्किल है।
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