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चीनी स्मार्टफोन बने भारतीय ब्रांडों के लिए चुनौती

Mon, 16 Jun 2014 04:05 PM IST
न्यूयार्क/एजेंसी
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देश के खिलौना और इलेक्ट्रानिक उत्पादों तगड़ी चोट देने के बाद चीनी कंपनियां अब भारत के स्मार्ट फोन बाजार पर कब्जा जमा रही हैं। जियोनी, लेनेवो, ओप्पो, हुआवे, जेडटीई और कोनका सहित मोबाइल हैंडसेट बनाने चीन की आठ प्रमुख कंपनियों ने देश के स्मार्टफोन बाजार में करीब 10 फीसदी की हिस्सेदारी हासिल कर ली है। बाजार में उनके बढ़ते दखल से सबसे कड़ी चुनौती माइक्रोमैक्स, कार्बन, लावा, इंटेक्स और मैक्स जैसे भारतीय मोबाइल ब्रांडों को मिल रही है।
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चीनी स्मार्टफोनों को भारत में मिल रही इस कामयाबी से उत्साहित वहां की करीब 45 कंपनियां भारतीय बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में जोपो, यूएमई, जियायू, मोगू जैसे चीनी मोबाइल ब्रांड जल्द ही भारतीय बाजार में नजर आ सकते हैं।

जानकारों के अनुसार अधिकांश चीनी कंपनियां देश के छोटे शहरों को लक्ष्य करके भारत में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। चीनी कंपनियां फिलहाल किफायती कीमतों पर ढेर सारे आधुनिक फीचर देने के चलते देश में हर माह दो से तीन लाख स्मार्टफोनों की बिक्री कर रही हैं।
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इन मोबाइलों की कीमत 3,000 से लेकर 40,000 रुपये तक है। चीनी मोबाइल कंपनियां बाजारों में सीधे अपने हैंडसेट उतारने के साथ ही ऑनलाइन चैनल का इस्तेमाल भी कर रही हैं। चीनी मोबाइल बाजार में हिस्सेदारी के मामले में एप्पल को पीछे छोड़ चुकी जियोनी ने भारत में अपने हैंडसेटों की ऑनलाइन बिक्री के लिए ई-शॉपिंग पोर्टल जबंग के साथ करार किया है।

चीन के बाजार में मोबाइल फोन की मांग सुस्त पड़ने के बाद वहां की कंपिनयां भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे एशिया के उभरते हुए बाजारों में अपनी पैठ बनाने की होड़ में लगी हुई हैं। चीनी कंपनियों को भारतीय बाजार में अपार संभावनाएं दिख रही हैं।

वर्ष 2014 की पहली तिमाही में भारत के स्मार्टफोन कारोबार में 186 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश में हर साल तीन करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोनों की बिक्री होती है। ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय स्मार्टफोन बाजार में इलेक्ट्रानिक उत्पाद बनाने वाली दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग का दबदबा बना हुआ है और उसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत है। इसके बाद माइक्रोमैक्स की 15 फीसदी, कार्बन की 10, लावा की 6 और नोकिया की चार फीसदी हिस्सेदारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय मोबाइल बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा अगर इसी तरह बढ़ता रहा, तो घरेलू कंपनियों पर विपरीत असर पडे़गा। ऐसे में देश की मोबाइल कंपनियों को चीनी ब्रांडों से टक्कर लेने के लिए उन्नत तकनीक और बेहतर फीचर वाले चीनी स्मार्टफोनों से भी सस्ते फोन पेश करने होंगे।
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