कार निर्यात में बढ़ोतरी के लिए छोटे कार निर्माता अब नए बाजार की तलाश में जुट गए हैं। निर्यात बाजार के विकास के लिए कार निर्माता सरकार से नए देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि जिन देशों के साथ भारत ने एफटीए किया है, वहां भारत में निर्मित कार की कोई मांग नहीं है। कार निर्यात को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा लायक बनाने के लिए निर्माताओं ने कार निर्यात से पहले लगने वाले कई प्रकार के करों में भी छूट देने की मांग की है।
नए एफटीए व कार निर्माताओं की अन्य मांगों को लेकर वाणिज्य मंत्रालय के साथ बातचीत करने वाली सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सिआम) के मुताबिक भारत का एफटीए जापान, कोरिया जैसे देशों से हैं जहां भारतीय कार की कोई मांग नहीं है। दूसरी तरफ अफ्रीका, लैटिन अमेरिका व एशिया के कई देशों में भारत की छोटी कारों की काफी मांग है। लेकिन इन देशों के साथ भारत का एफटीए नहीं होने से शुल्क छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सिआम के उप महानिदेशक एस. सेन का कहना है कि चिली में भारतीय कार की मांग अधिक है, लेकिन चिली के साथ हमारा कोई एफटीए नहीं है। इस वजह से जिन देशों के साथ चिली का एफटीए है, उन देशों की कारें चिली में ज्यादा बिक रही हैं। सिआम ने वाणिज्य मंत्रालय से अफ्रीका, दक्षिण एशिया व लैटिन अमेरिका के देशों के साथ एफटीए करने की मांग की है। वित्तवर्ष 2013-14 में अफ्रीका में लगभग पांच लाख कारों का निर्यात किया गया जो कुल कार निर्यात का एक तिहाई हिस्सा है।
सिआम ने वाणिज्य मंत्रालय से निर्यात होने वाली कारों पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के करों में भी छूट देने की मांग की है। सेन के मुताबिक इससे भारतीय कार की निर्यात कीमत कम हो जाएगी और हमारी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ जाएगी। चालू वित्त वर्ष 2014-15 के पहले सात महीनों में वैश्विक सुस्ती की वजह से कार निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। श्रीलंका, अल्जीरिया, नाइजीरिया, चिली जैसे देशों में भारत काफी संख्या में कार निर्यात करता है।