युवाओं को लुभाने के लिए अंतिरम बजट में अप्रैल 2009 के पहले मिले एजुकेशन लोन पर ब्याज माफी की घोषणा, चुनावी स्टंट साबित होने जा रही है।
स्कीम की पात्रता तय करने के जो दिशा-निर्देश बैंकों को जारी किए गए हैं, उसे देखते हुए एजुकेशन लोन लेने वाले विद्यार्थियों का बड़ा वर्ग छूट का लाभ नहीं ले सकेगा।
ऐसे में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का यह दावा कि ब्याज में छूट का लाभ 8-9 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा, वह शायद पूरा न हो सके।
क्या हैं स्कीम
बैंकों के लिए जारी दिशानिर्देश के अनुसार अगर किसी छात्र ने अप्रैल 2009 से पहले लोन लिया है, लेकिन उसके कर्ज का कुछ हिस्सा फीस के रूप में 1 अप्रैल 2009 के बाद जारी किया है, तो उसको अप्रैल 2009 के पहले मिले कर्ज के ब्याज पर माफी नहीं मिलेगी।
ऐसा इसलिए होगा क्योंकि उसे अप्रैल 2009 के बाद मिले कर्ज पर नई स्कीम के तहत ब्याज में छूट मिल चुकी होगी। इसी तरह एजुकेशन लोन पर लगने वाले ब्याज का वह हिस्सा जो मोरेटेरियम पीरियड में आता है, उस अवधि के ब्याज में कोई छूट नहीं मिलेगी। बैंक इस अवधि के ब्याज को कैपिटलाइज कर मूलधन में डाल देते हैं।
कितना मिला है पैसा
पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि स्कीम के दिशा-निर्देश में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिससे ब्याज छूट का लाभ एक बड़े वर्ग को मिलना मुश्किल है।
अधिकारी के अनुसार स्कीम के लिए 2,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है, लेकिन दिशा-निर्देशों को देखते हुए 700-800 करोड़ रुपये ही एडजस्ट हो पाएंगे।
अंतरिम बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि 31 मार्च 2009 तक एजुकेशन लोन लेने वाले विद्यार्थियों का ब्याज सरकार चुकाएगी। इसके तहत 31 दिसंबर 2013 तक जो ब्याज अदायगी छात्र-छात्राओं पर बनती है, वह उन्हें नहीं देना होगा।
स्कीम का लाभ मौजूदा एजुकेशन लोन पर मिलने वाली छूट की तरह उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिनके माता-पिता की सालाना आय 4.5 लाख रुपये या उससे कम है।