प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वैश्विक कारणों से पिछले तीन वर्षों के दौरान पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था में जल्द सुधार का भरोसा दिया है।
लोकसभा में उन्होंने कहा कि दो-तीन सालों में अर्थव्यवस्था मजबूत विकास के रास्ते पर लौट आएगी। बजट में मजबूत आर्थिक विकास दर के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनका असर जल्द दिखना शुरू हो जाएगा।
विपक्ष को अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक राजनीति से परहेज की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं सदन से आग्रह करूंगा कि अपने लोगों की भावनाओं को गिराने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। हम मुश्किल में हैं, लेकिन दो-तीन वर्षों में हम अर्थव्यवस्था को मजबूत विकास के पथ पर वापस लाने में सफल होंगे।’
उन्होंने बताया कि वर्ष 2008-09 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकिंग संकट और 2011 में यूरोजोन संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
प्रश्नकाल के दौरान हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था में मंदी आई है, जो आर्थिक विकास दर के आंकड़ों से भी झलकती है। ऐसा नहीं है कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार कुछ कर नहीं रही है।
बल्कि, सरकार ने उच्च आर्थिक विकास दर हासिल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका उल्लेख नए बजट में किया गया है। 2011-12 की आर्थिक समीक्षा और वित्त मंत्री के बजट भाषण में मंदी के लिए जिम्मेदार कई कारणों का जिक्र किया गया है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए भी आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार कारकों का खुद उन्होंने उल्लेख किया था।
हंगामा
लोकसभा में एक पूरक सवाल के जवाब में योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ला के उत्तर ने खासा हंगामा खड़ा कर दिया। जिस पर प्रधानमंत्री को राजीव शुक्ला के बचाव में आना पड़ा। प्रधानमंत्री ने आंकड़ों की चूक को सुधारकर स्थिति को संभाला।
राजीव शुक्ला ने कहा कि 2003-04 में जब राजग सरकार ने सत्ता छोड़ी थी तो देश की जीडीपी चार फीसदी पर थी। उनके इस जवाब पर भाजपा ने कहा कि वाजपेयी सरकार ने सत्ता छोड़ी थी, तो जीडीपी 8.6 फीसदी थी।