भारत में इस समय आर्थिक एवं सामाजिक सुधारों की जो लहर चल रही है, वह यदि बरकरार रही तो कुछ ही वर्ष में अर्थव्यवस्था की विकास दर 9 फीसदी सालाना हो जाएगी। इसी के साथ दो दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6,19,000 अरब रुपये (10 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच जाएगा। यह बात प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) द्वारा भारत पर तैयार एक रिपोर्ट में कही गई है।
अंतरराष्ट्रीय सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी इंटरनेशनल के अध्यक्ष डेनिस नैली ने सोमवार को यहां ‘फ्यूचर ऑफ इंडिया, दि विनिंग लीप’ शीर्षक से एक रिपोर्ट को जारी करने के बाद बताया कि भारत में तेजी से मध्य वर्ग उभर रहा है। इसके साथ ही एक युवा जन सांख्यिकीय संरचना तैयार हो रही है, जो कि डिजिटल तौर पर सक्षम है। यह बेहतर आर्थिक और सामाजिक विकास को हासिल करने हेतु भारत के लिए एक अवसर है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था द्वारा सृजित किए जाने वाले मूल्यों के तरीके को बदल कर भारत अपने सवा सौ करोड़ लोगों के लिए एक समान समृद्धि का निर्माण कर सकता है। उनके मुताबिक आने वाले दशक में हर वर्ष एक से सवा करोड़ रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे, बशर्ते कि इसके लिए कंपनी और उद्यमी एक साथ मिल कर काम करें।
रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि भारत को विकास की तरफ एक बड़ी छलांग लगाने की आवश्यकता है। यदि यहां के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को 10 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचाना है तो अर्थव्यवस्था की विकास दर को 9 फीसदी वार्षिक के स्तर पर पहुंचाना ही होगा।
पीडब्ल्यू इंडिया के अध्यक्ष दीपक कपूर ने इस अवसर पर बताया कि भारत को विकास की ओर बड़ी छलांग लगाने में कंपनियां अकेले काम करें, तो सफल नहीं हो सकती हैं। सफलता तभी मिलेगी, जबकि उद्यमी भी उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करें। क्योंकि उद्यमियों में खोजपरक समाधानों के विकास के लिए महत्वपूर्ण गुण, जोखिम उठाने की इच्छा शक्ति, त्वरित निर्णय लेने की अभिरुचि एवं निडरता आदि होते हैं।
सरकार के लिए यह भी आवश्यक है कि वह राष्ट्रीय मंचों के सृजन के जरिये अपने समर्थन का विस्तार करे, जो इस वृद्धि को और अधिक प्रभावी बनाए तथा व्यवसाय सूचकांक तैयार करने की सरलता को बढ़ावा दे सके। इस रिपोर्ट 10 क्षेत्रों के अध्ययन पर आधारित है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, कृषि, रिटेल, बिजली, विनिर्माण, वित्तीय सेवाएं, शहरीकरण आदि शामिल हैं।