अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर छोटे कारोबारियों पर भारी पड़ रहा है। इसकी वजह से जहां कारोबारियों को नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, वहीं उन्हें बैंकों के कर्ज चुकाने में भी दिक्कत आ रही है।
इसके तहत छोटे कारोबारियों को बैंकों से मिले कुल कर्ज में 10 फीसदी कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग के लिए पहुंच चुके हैं। इससे बैंकों की गैरनिष्पादि परिसंपत्तियों (एनपीए) में भी इजाफा हुआ है।
हरियाणा चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट एएल अग्रवाल के अनुसार मौजूदा समय में रिजर्व बैंक को थोड़ी राहत देनी चाहिए।
मांग कम होने और कर्ज महंगा होने से कारोबारियों पर प्रतिकूल असर हो रहा है। ब्याज दरें 14-16 फीसदी तक हैं, पर एनपीए के मानक वैश्विक स्तर के समान है। कारोबारी 90 दिन तक कर्ज न चुकाने पर डिफॉल्ट हो जाता है।
ऐसे में जब छोटे कारोबारियों को बड़ी कंपनियों से भुगतान ही 90-120 दिन के बीच मिल रहा है, तो वह 90 दिन में कर्ज कैसे चुकाएंगे। रिजर्व बैंक को यहां छोटे कारोबारियों के लिए राहत देना बहुत जरूरी है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार कर्ज न चुकाने की वजह से इन कारोबारियों को नए कर्ज लेने में दिक्कत आ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि रिकार्ड खराब होने से उनकी परिसंपत्तियों का भी जोखिम बड़ा है।
रिजर्व बैंक के अनुसार मार्च 2013 तक छोटे कारोबारियों की परिसंपत्तियों के ह्रास का अनुपात 10 से 15 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है। यह मार्च 2012 में 9-10 फीसदी के करीब था।
बैंकों के कर्ज न चुकाने की दर भी मार्च 13 में 5.19 फीसदी से लेकर 9.80 फीसदी पहुंच गई है, जो कि छोटे और मझोले क्षेत्र का सकल एनपीए है।