डीटीसी का घाटा पाटने के लिए दिल्ली सरकार ने डिपो को अपग्रेड करके बजट होटल बनाने की योजना पर काम शुरू किया है। योजना को कैबिनेट की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।
फिजिबिलिटी स्टडी की जिम्मेदारी दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम को दी जाएगी। मास्टर प्लान में ऊंची इमारतों में पचास फीसदी ऑपरेशन एरिया और पचास फीसदी में भवन निर्माण का हवाला देकर डीटीसी कर रही है। शुरुआत में श्रीनिवासपुरी, वसंत विहार, सरोजनी नगर और कालकाजी डिपो का चयन किया गया है।
दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि 2012-13 में डीटीसी का सालाना घाटा 803 करोड़ रुपये पहुंचने की संभावना है। यह प्रति किलोमीटर 23 रुपये बैठता है। अगर केंद्र और राज्य सरकार के लोन के ब्याज को शामिल कर लें तो यह घाटा 3020 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है जो प्रति किमी 85 रुपये है।
इन सबको देखते हुए बजट होटल बनाकर प्राइम लोकेशन पर बने डिपो से राजस्व निकालने की कोशिश है। डीटीसी के नेहरू प्लेस और राजा गार्डन टर्मिनल को दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने फेस-तीन के प्रोजेक्ट के लिए मांगा है। उन्होंने भी सुझाव दिया है कि प्रॉपर्टी डेवलपमेंट करके जगह निकाली जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली कैबिनेट के सामने डीटीसी ने पहली बार 19 मार्च, 2007 में डिपो को विकसित करके राजस्व के लिए उसका इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा था। उस समय मंजूरी नहीं मिली थी। दूसरी बार कैबिनेट में मामला 28 अगस्त, 2008 को आया जिसे मंजूरी दे दी गई।
इस बीच कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में जुटी डीटीसी ने प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया। अब फिर से तैयारी शुरू की जा रही है। चार डिपो में बजट होटल बनाने के नफा-नुकसान का आकलन, फिजिबिलिटी स्टडी, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और निर्माण टेंडर तक की जिम्मेदारी दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) को सौंपी जाएगी। दो बैठकें हो चुकी हैं। डीटीसी बोर्ड से मंजूरी मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिछले दस वर्षों में डीटीसी का घाटा ग्राफ
वर्ष----परिवहन घाटा (करोड़ रुपये)----कुल घाटा
2003-04----224.95----546.34
2004-05----289.70----708.57
2005-06----269.75----879.38
2006-07----389.82----954.82
2007-08----325.39----1222.97
2008-09----563.90----1697.69
2009-10----683.50----2042.73
2010-11----498.61----2335.12
2011-12----550.00----2434.00
2012-13----803.00----3019.77(अनुमान)