तकनीकी खामियों के चलते बोइंग ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ानों पर लगी पाबंदी ने एयर इंडिया में पायलटों की किल्लत बढ़ा दी है। डीजीसीए के निर्देश के बाद एयर इंडिया ने आनन-फानन में अपने छह बोइंग 787 ड्रीमलाइनर पर कुछ समय के लिए रोक तो लगा दी है लेकिन इनकी जगह दूसरे विमानों को लगाने में पायलटों की कमी बाधा बन सकती है। पायलटों की कमी को देखते हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस पिछले साल हड़ताल के बाद निकाले गए 13 पायलटों में से दो उप कप्तानों की सेवाएं लेने पर तैयार हो गई है। माना जा रहा है जल्द ही एयर इंडिया अनुबंध पर बाकी पायलटों की सेवाएं लेने पर राजी हो सकती है।
गत बृहस्पतिवार को उड़ान भरने से रोके गए छह ड्रीमलाइनर के लिए एयर इंडिया ने कुल 80 पायलटों को प्रशिक्षित किया था। फिलहाल ड्रीमलाइनर का इस्तेमाल तीन घरेलू और तीन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में किया जा रहा था। इन पर रोक के बाद विमानन कंपनी ने घरेलू उड़ानों पर एयर बस जबकि दुबई, पेरिस और फ्रैंकफर्ट पर बोइंग के दूसरे विमानों को लाने का निर्णय किया है।
कंपनी के सूत्रों का कहना है कि ड्रीमलाइनर के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित किए गए 80 पायलटों में से सिर्फ 40 ही पहले बोइंग विमान उड़ाने का अनुभव रखते हैं जबकि बाकी पायलट एयर बस से ड्रीमलाइनर पर गए थे। बोइंग का अनुभव रखने वाले पायलटों को भी ड्रीमलाइनर की जगह इस्तेमाल किए जा रहे बोइंग 777 विमान उड़ान के लिए करीब सप्ताह भर के शॉर्ट ट्रांजिस्ट कोर्स से गुजरना पड़ेगा। जबकि तुरंत बड़ी संख्या में पायलटों को प्रशिक्षित करना भी एक चुनौती है।
नागर विमानन मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया एक्सप्रेस पिछले साल पायलटों की हड़ताल के बाद निकाले गए 13 पायलटों में से 2 उप कप्तान को अनुबंध पर लेने को तैयार हो गई है। गौरतलब है कि बाकी 11 लोगों में से 8 बोइंग 777 के अनुभवी कमांडर हैं। बदली स्थितियों और पायलटों की कमी को देखते हुए एयर इंडिया इन्हें भी अनुबंध पर सेवाएं देने की छूट दे सकती है। हाल के दिनों में एयर इंडिया में पायलटों की कमी के चलते उड़ान लेट या रद्द होने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में ड्रीमलाइनर की गड़बड़ी ने एयरलाइंस की चुनौती को और भी बढ़ा दिया है।