प्रदेश के गोदामों में रखे रखे एक लाख 80 हजार मीट्रिक टन चावल खराब हो गया है। इसकी कीमत करीब 360 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एफसीआई ने गत वर्ष के इस चावल को यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कि वह उनके मानकों पर खरा नहीं है। इसे कार्ड धारकों में वितरित नहीं किया जा सकता है। इस चावल के स्थान पर नए चावल की मांग की जा रही है। जिससे अधिकारियों में हड़कंप है।
उत्तर प्रदेश में करीब चार हजार राइस मिलें हैं। यह मिलें हर साल सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे जाने वाले धान को कूटकर चावल बनाती हैं। यह चावल एफसीआई के गोदामों को सप्लाई कर दिया जाता है। यहां से जो पेमेंट मिलता है उससे काश्तकारों को भुगतान होता है। गत वर्ष एफसीआई ने करीब बीस लाख कुंतल चावल यह कहकर वापस कर दिया था कि उनके गोदामों में अब जगह नहीं है।
राइस मिलर्स अपने यहां भंडारण कर लें और अगले साल उन्हें सप्लाई कर दें। लेकिन इस साल जब राइस मिलर्स चावल को लेकर एफसीआई वालों के पास पहुंचे तो उन्होंने पुराना चावल लेने से ही इंकार कर दिया। कह दिया कि इसकी क्वालिटी खराब हो गई है। इसे पीडीएस सिस्टम में सप्लाई नहीं किया जा सकता। एफसीआई के इस इंकार से अफसरों में हड़कंप मच गया है। प्रदेश सरकार तक बात पहुंचाई गई है। सबसे बड़ी बेचैनी यह है कि इस चावल को कहां खपाया जाएगा।
अगर प्राइवेट मार्केट में भी सप्लाई करेंगे तो उतने दाम नहीं मिलेंगे। आरएफसी सुधाकर मिश्र ने बताया कि मार्केटिंग इंसपेक्टर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। इनकी मांग है कि पिछले साल का जो चावल फंसा है उसका निस्तारण कराया जाए। सबसे ज्यादा चावल आजमगढ़, बस्ती, फैजाबाद, गोरखपुर, देवीपाटन, वाराणसी और इलाहाबाद के गोदामों में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गोदामों में भी पिछले साल का चावल पड़ा है।