रुपये में गिरावट महंगाई के साथ अब आपके लिए कर्ज महंगा होने की भी परेशानी ला रहा है। बैंकों ने वित्त मंत्री के आश्वासन के बावजूद अब कर्ज महंगा करना शुरू कर दिया है।
निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी ने तीन अगस्त से अपने बेस रेट में 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इसके पहले येस बैंक ने भी अपना कर्ज महंगा कर दिया था।
ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी आने वाले दिनों में बढ़ी लागत की भरपाई के लिए रास्ता तलाश रहे हैं। इसके तहत बैंक कुछ उत्पादों पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
आरबीआई द्वारा 30 जुलाई को मौद्रिक नीति आने के बाद वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आश्वासन दिया था कि कर्ज महंगा नहीं होगा।
लेकिन, छोटे बैंकों के बाद बड़े बैंक भी कर्ज महंगा करने की शुरुआत कर चुके हैं। एचडीएफसी बैंक का बेस रेट 9.6 फीसदी से बढ़कर 9.8 फीसदी हो गया है।
सरकारी बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। आरबीआई ने रुपये को संभालने की खातिर बैंकों के लिए पूंजी जुटाने में सख्ती की है लेकिन इसका भी असर ज्यादा सफल होता नहीं दिख रहा है।
आरबीआई शुरू से यह कह रहा है कि रुपये की स्थिति सुधरने पर ही सख्ती वापस ली जाएगी। ऐसे में यह दौर भी लंबा खिंच रहा है। इसे देखते हुए बैंकों के लिए पूंजी जुटाना महंगा होता जा रहा है।
ऐसे में बैंक कई सारी संभावनाएं तलाश रहे हैं जिससे लागत में कमी आए। इसके तहत कुछ खास श्रेणी के उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
पिछले 10 दिनों में ओबीसी, येस बैंक, एक्सिस बैंक सहित कई बैंकों ने कम अवधि की जमा दरों में बढ़ोतरी की है। बैंकर्स के अनुसार यदि रुपया इसी तरह कमजोर रहा, तो बैंक कर्ज महंगा कर सकते हैं।
रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर
आयातकों द्वारा डॉलर की मांग और घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट के बीच बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 53 पैसे गिरकर 61.30 के स्तर पर बंद हुआ।
पिछले सत्र रुपया 60.77 के स्तर पर रहा था। अंतर बैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपये में गिरावट के साथ 61.15 पर कारोबार शुरू हुआ।
घरेलू बाजारों में रिकवरी आने पर यह सुधरकर 60.94 के स्तर पर आया। लेकिन, बाद शेयरों में गिरावट से रुपया 61.45 के न्यूनतम तक लुढ़क गया। आखिर में पिछले सत्र की तुलना में 53 पैसे गिरकर 61.30 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
मुद्रा बाजार के कारोबारियों का कहना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा बांड खरीदारी में कमी लाने की अटकलों से भी रुपये में कमजोरी आई।