भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और उसके छह प्रोमोटरों पर तीन साल की रोक लगाए जाने के फैसले के खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय प्राधिकारण (सैट) के समक्ष अपनी अपील दायर की है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी की अपील पर सैट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
सेबी ने हाल ही में देश की सबसे बड़ी रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और उसके छह आला अधिकारियों के बाजार में कारोबार करने पर तीन साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें कंपनी के चेयरमैन और प्रोमोटर केपी सिंह भी शामिल हैं। सेबी ने यह कार्रवाई कंपनी द्वारा अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से जुड़ी घोषणाओं में गड़बड़ी के चलते की है। सेबी ने डीएलएफ और इसके छह अधिकारियों को तीन साल तक पूंजी बाजार में किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त करने से रोक दिया था।
गौरतलब है कि 30 जून तक डीएलएफ पर 19,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके बावजूद कंपनी अपने महंगे कर्ज की अदायगी के लिए बांड जारी करके बाजार से करीब 3,500 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की तैयारी में थी। बाजार विश्लेषक सेबी द्वारा डीएलएफ पर की गई कार्रवाई किसी ब्लूचिप कंपनी के खिलाफ की गई गिनीचुनी सख्त कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। करीब 10 हजार करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाली इस कंपनी पर सेबी की इस कार्रवाई से कंपनी के शेयर में अगले दिन 28 फीसदी की बड़ी गिरावट आई थी।
इससे कंपनी के प्रोमोटरों को 5,578 करोड़ रुपये की तगड़ी चोट लगी लग चुकी है। इन प्रोमोटरों के कंपनी में 74.91 फीसदी शेयर हैं। शेयरों का मूल्य घटने से उसके विदेशी निवेशकों की पूंजी में भी 1,500 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। बीती तिमाही (जुलाई-सितंबर) में कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की हिस्सेदारी मामूली घटकर 19.75 फीसदी पर रही। अप्रैल-जून तिमाही में एफआईआई की हिस्सेदारी 19.88 फीसदी पर थी।