रिसर्च फर्म केपीएमजी और उद्योग संगठन सीआईआई की एक साझा रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों के दौरान देश में डिजिटल कारोबार के काफी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इसमें ई-रिटेल से लेकर नए किस्म के मोबाइल एप्स तक के लिए विस्तार की काफी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। देश में डिजिटल कारोबार में यह तेजी आगामी वर्षों में शहरीकरण की तेज रफ्तार के चलते देखने को मिलेगी।
‘डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर : एनेबलिंग दि वर्ल्ड ऑफ टुमॉरो’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की शहरी आबादी में 2015 से 2020 तक 1.84 फीसदी की दर से वृद्धि होगी। वर्ष 2020 से 2025 के बीच यह वृद्धि 1.63 फीसदी और 2025 से 2030 के बीच 1.44 फीसदी रहेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑनलाइन रिटेल खरीदारी वर्ष 2018 तक बढ़कर 1,006 अरब रुपये (16 अरब डॉलर) के स्तर तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही 2018 तक देश में ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 1.28 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2013 में देश में ऑनलाइन रिटेल में 67 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में अगले कुछ सालों में देश में मोबाइल एप्लीकेशनों के कारोबार में भी तेज वृद्धि दिखने की उम्मीद जताई गई है। इसमें खासतौर पर मोबाइल सेंसिंग तकनीक से लैस हेल्थ और फिटनेस से जुडे़ ऐप्स के कारोबार में अगले पांच वर्षों में तेजी से विस्तार देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न सेक्टरों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी के साथ विकास होगा। ऐसे में डिजिटल प्लेटफार्म को सबसे पहले अपनाने वाली कंपनियां फायदे में रहेंगी। पहले शुरुआत करने के चलते इन्हेें खुद को बाजार में टॉप पर स्थापित करने में आसानी रहेगी।
सीआईआई द्वारा आयोजित कनेक्ट कॉन्फ्रेंस-2014 में रिपोर्ट का हवाला देते हुए केपीएमजी में पार्टनर केके रमण ने कहा कि आने वाले वर्षों में कनेक्टेड डिवाइसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। ऐसे में देश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेज गति से विस्तार देखने को मिलेगा। इससे भविष्य में अवसरों के नए द्वार खुलेंगे और आर्थिक क्षमता बढ़ाने में भी यह मददगार साबित होगा। मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाने में भी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर अहम भूमिका निभा सकता है।