देश में डीजल कारों की बिक्री में पिछले पांच साल में तेजी से इजाफा हुआ है।
साथ ही इन कारों की गुणवत्ता भी काफी बेहतर हुई है। जेडी पावर की रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच साल के दौरान नए डीजल वाहनों के मालिकों की शिकायतों में बीते पांच साल के दौरान काफी अधिक कमी आई है।
जेडी पावर के अध्ययन में नई डीजल गाड़ियों की ड्राइविंग के पहले दो से छह महीने के दौरान इनमें आने वाली शिकायतों का आकलन किया गया और आठ वाहन श्रेणियों में (जिनमें जल्दी जल्दी समस्याएं समाने आती हैं) 200 से अधिक दिक्कतों के लक्षणों की पड़ताल की गई।
इनमें इंजन एवं ट्रांसमिशन, व्हीकल एक्सटीरियर एवं इंटीरियर, ड्राइविंग अनुभव, कंट्रोल एवं डिस्प्ले, सीट, ऑडियो, इंटरटेनमेंट और नेविगेशन शामिल हैं।
वाहनों की इन समस्याओं को नंबर ऑफ प्रॉब्लम प्रति 100 व्हीकल (पीपी100) के रूप में आंका गया। पीपी100 का निचला स्कोर वाहनों में आने वाली दिक्कतों की न्यूनतम दर और अधिक गुणवत्ता को दर्शाता है।
देश में 2010 की तुलना में 2014 के दौरान डीजल वाहनों की बिक्री 16 फीसदी बढ़ी है। वहीं, डीजल वाहनों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। 2014 में डीजल वाहनों में दिक्कतें घटकर 96 पीपी100 पर आ गईं, जो 2010 में 148 पीपी100 थीं।
जेडी पावर एशिया प्रशांत (सिंगापुर) के कार्यकारी निदेशक मोहित अरोड़ा का कहना है कि कुल मिलाकर देखें तो डीजल वाहनों की गुणवत्ता में ऑटो इंडस्ट्री ने अच्छी खासी उन्नति की है।
हालांकि, देश में सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर होने से वाहनों की ड्राइविंग कम हुई है। कार पुलिंग का चलन बढ़ने से भी डीजल वाहनों की ड्राइविंग पहले से कम हुई है। डीजल वाहनों की दिक्कतों में कमी लाने में इससे भी मदद मिल रही है।