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खुशखबरी: अब हर महीने नहीं बढ़ेंगे डीजल के दाम!

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट और रुपये की मजबूती मोदी सरकार के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
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पहली बार डीजल की बिक्री पर तेल कंपनियों का घाटा (अंडर-रिकवरी) सिर्फ 8 पैसे प्रति लीटर रह गया है। इससे न सिर्फ डीजल पर हर महीने 50 पैसे की मूल्य वृद्धि का सिलसिला थम सकता है बल्कि सरकार पर पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ करीब 50 हजार करोड़ रुपये कम हो सकता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल के दाम घटकर 100.97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 60.47 के स्तर पर है।
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इस तरह एक सितंबर से शुरू होने वाले पखवाड़े में तेल कंपनियों की डीजल पर अंडर रिकवरी घटकर सिर्फ 8 पैसे रह गई है। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब डीजल की लागत और बिक्री का अंतर तकरीबन समाप्त होने जा रहा है।

डीजल की लागत और बिक्री के अंतर को पाटने के लिए जनवरी, 2013 से हर महीने 50 पैसे की दाम वृद्धि की जा रही है।

लेकिन अंडर-रिकवरी घटकर सिर्फ 8 पैसे रह जाने के बाद डीजल के दाम भी पेट्रोल की तरह बाजार के हवाले करने का समय करीब आ गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली पहले ही डीजल के दाम बाजार के हवाले करने का संकेत दे चुकी है।
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अर्थव्यवस्था को मिलेगी बड़ी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मोदी सरकार को कई मोर्चों पर राहत मिल रही है।

डीजल सब्सिडी का पूरा बोझ सरकार के कंधों से उतरने जा रहा है जबकि पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी अंडर रिकवरी घटकर 32.67 और 427.82 रुपये रह गई है।

तेल कंपनियों को अंडर रिकवरी केचलते रोजाना 195 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि पिछले सप्ताह तक घाटा 230 करोड़ रुपये था।

अगर रुपये की मजबूती और कच्चे तेल के दाम में गिरावट कायम रही तो वर्ष 2014-15 में कुल अंडर-रिकवरी पिछले साल के 1.40 लाख करोड़ से घटकर 91 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

जिससे सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपये की पेट्रोलियम सब्सिडी की बचत हो सकती है।

मजबूत सरकार से रुपये को ताकत
केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार के आने से डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत मिली है। रुपये की मजबूती के चलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचा और पिछले दो महीनों में पेट्रोल के दाम करीब साढे़ चार रुपये कम हुए हैं।
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