डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की तगड़ी मार जल्द ही एक झटके में आपके घरेलू बजट को तहस-नहस कर सकती है। आपको जोर का यह झटका लग सकता है डीजल की कीमतों में एकाएक बढ़ोतरी से।
सरकारी तेल कंपनियों ने रुपए में गिरावट के चलते डीजल की बिक्री पर घाटा बढ़कर 10.22 रुपए प्रति लीटर पर पहुंचने की दुहाई देते हुए सरकार से डीजल की कीमतें एकमुश्त बढ़ाने की इजाजत मांगी है।
सरकार की ओर से मंजूरी मिलते ही कंपनियां एक झटके में डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं। डीजल के दाम में भारी वृद्धि से भाड़ा व ढुलाई की लागत बढ़ने के चलते महंगाई की चौतरफा मार आम आदमी पर पड़ सकती है।
डीजल की कीमतों में प्रतिमाह 50 पैसे की बढ़ोतरी के बाद डीजल की बिक्री पर तेल कंपनियों का घाटा मई में घट कर तीन रुपए प्रति लीटर से कम के स्तर पर आ गया था।
पिछले दो माह से रुपए में लगातार जारी गिरावट के चलते कंपनियों का यह घाटा बढ़कर 10.22 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। अगस्त की शुरुआत में यह घाटा 9.29 रुपए प्रति लीटर था।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के डायरेक्टर (फाइनेंस) पीके गोयल ने बताया कि हमने सरकार से डीजल की कीमतों में तात्कालिक रूप से बढ़ोतरी करने का आग्रह किया है। इस पर फैसला सरकार को लेना है। हम इस बारे में इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
उन्होंने कहा कि अप्रैल के बाद से रुपया करीब 12 फीसदी कमजोर पड़ चुका है। उस समय भाव 59.39 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर था, जो आज बढ़कर 64.10 रुपए प्रति डॉलर पर आ गया है। रुपए में इस गिरावट से हमारी अंडर रिकवरी (घाटे) में 8,000 करोड़ रुपए में बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि 17 सितंबर तक कंपनियों को वित्त वर्ष की पहली तिमाही की सब्सिडी के तौर पर 8,000 करोड़ रुपए सरकार की ओर से मिल सकते हैं।
डीजल के अलावा तेल कंपनियों को केरोसिन पर 33.54 रुपए प्रति लीटर व घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 412 रुपए प्रति सिलिंडर का नुकसान हो रहा है।
ऐसे में तेल कंपनियों का मानना है कि डीजल के दामों में प्रति माह 50 पैसे की बढ़ोतरी नाकाफी लग रही है और उनका मानना है की कीमतों में एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी से ही घाटे में कमी लाई जा सकती है।