बाजार मूल्य से कम कीमत पर डीजल की बिक्री होने के कारण तेल कंपनियों को 6.42 रुपए प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक डीजल बेचने पर तेल कंपनियों को रोजाना 348 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। माना जा रहा है कि तेल कंपनियां जल्द ही 40-50 पैसा प्रति लीटर डीजल के दाम बढ़ा सकती है।
दरअसल तेल कंपनियों को सरकार की ओर से आंशिक मूल्य वृद्धि की स्वतंत्रता मिली हुई है। इसका लाभ उठाते हुए कंपनियों ने पिछले तीन माह से डीजल के दाम में करीब 50 पैसा प्रति लीटर का लगातार इजाफा किया है।
इसी क्रम में जल्द एक बार और मूल्य वृद्धि हो सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल-दिसंबर 2012 के बीच डीजल बिक्री पर कंपनियों की कुल अंडर रिकवरी 73,815 करोड़ रुपए रही है।
हालांकि डीजल की अंडर रिकवरी मंगलवार को कम हुई है। यह नुकसान पहले पखवाड़े के 6.52 रुपए प्रति लीटर से घटकर अब 6.42 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
दरअसल भारत के परिप्रेक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 99.28 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसका लाभ सोमवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में एक रुपए प्रति लीटर की कटौती कर उपभोक्ताओं को दिया है।
लेकिन डीजल मूल्य पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कम होने का असर होने की संभावना नहीं है। गौरतलब है कि घरेलू रसोई गैस की बिक्री पर कंपनियां 434.52 रुपए प्रति सिलेंडर का नुकसान झेल रही हैं। वहीं किरोसिन बिक्री पर नुकसान 30.49 रुपए प्रति लीटर है।