हड़ताली कर्मचारियों के साथ बकाया वेतन के मुद्दे पर बातचीत और कर्मचारियों के काम पर लौटने के बाद किंगफिशर के आला अधिकारियों ने एयरलाइन का कामकाज फिर से शुरू करने को लेकर नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के साथ बैठक की।
डीजीसीए प्रमुख अरुण मिश्रा के साथ करीब आधे घंटे की बैठक के बाद किंगफिशर के सीईओ संजय अग्रवाल ने बताया कि यह एक सामान्य बैठक थी। इसमें हमने अपनी एयरलाइन कंपनी को फिर से चालू करने संबंधी योजना के बारे में डीजीसीए को जानकारी दी है। जल्द ही हम इस बारे में आगे के विचार-विमर्श के लिए फिर से बैठक करेंगे।
उन्होंने बताया कि हमने किंगफिशर एयरलाइंस को दोबारा चालू करने के बारे में फिलहाल कोई योजना डीजीसीए को नहीं सौंपी है, पर हम जल्द ही ऐसा करने वाले हैं। कामकाज दोबारा शुरू करने और निलंबित हुए फ्लाइंग लाइसेंस की बहाली के लिए फिलहाल कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। किंगफिशर को 26 अगस्त 2003 को लाइसेंज जारी किया गया था, जोकि 31 दिसंबर 2012 तक के लिए वैध है।
सूत्रों का बताना है कि किंगफिशर की उड़ानों को फिर से शुरू करने के लिए सीईओ संजय अग्रवाल और कंपनी के मुखिया विजय माल्या जल्द ही बैठक करके वित्तीय योजना को अंतिम स्वरूप देने वाले हैं। इसके बाद डीजीसीए के साथ बैठक कर इस पर चर्चा की जाएगी। इसमें उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले विमानों की संख्या, रूटों के साथ-साथ विभिन्न बैंकों में बकाया कर्ज के भुगतान का मामला भी शामिल होगा।
सूत्रों का बताना है कि इन सारे मुद्दों पर एक ठोस कार्य योजना पेश किए जाने के बाद ही डीजीसीए किंगफिशर के लाइसेंस की बहाली पर कोई फैसला करेगा। हालांकि इस सबके बावजूद किंगफिशर की उड़ाने दोबारा शुरू हो पाने में अभी कम से कम तीन-चार सप्ताह का समय लग जाएगा, क्योंकि इसके लिए उसे वित्तीय और संचालन संबंधी इंतजामों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों के पूरी तरह से पालन को लेकर भी डीजीसीए को पूरा-पूरा भरोसा दिलाना होगा।
गौरतलब है कि किंगफिशर के कर्मचारी 27 दिन की हड़ताल और 25 दिन की तालाबंदी के बाद काम पर वापस लौट आए हैं। ऐसा कंपनी प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को दिसंबर के अंत तक चार महीने के बकाया वेतन के भुगतान का भरोसा दिलाने के बाद हुआ है।