राष्ट्रीय मैन्यूफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा काउंसिल (एनएमसीसी) ने मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और इनोवेशन को जरूरी बताया है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम में एनएमसीसी के सदस्य सचिव अजय शंकर ने कहा कि हमें मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को सफल बनाना ही होगा। बिना इनोवेशन के मैन्यूफैक्चरिंग की सफलता मुश्किल है। इस क्षेत्र की सफलता से सरकार को समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
एनएमसीसी का गठन सरकार ने घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के उपाय सुझाने के लिए किया था।
शंकर ने कहा कि कंपनियों को चाहिए कि वह निचले स्तर के कर्मचारियों को भी नए-नए तरीके और तकनीक सुझाने के लिए प्रोत्साहित करें। देश के समावेशी विकास के लिए इस क्षेत्र का विकास काफी महत्वपूर्ण है।
सरकार ने मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मैन्यूफैक्चरिंग नीति भी बनाई है। इसमें वर्ष 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र का योगदान बढ़कर 25 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है, जो फिलहाल 16 फीसदी है।
नई नीति में राष्ट्रीय निवेश एवं मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र बनाने की बात भी कही गई है, जो दुनिया में औद्योगिक शहरों के लिए नए मानदंड बनकर उभर सकें।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के विकास दर में कमी आई थी और यह 0.8 फीसदी नकारात्मक रहा था, जबकि वित्त वर्ष 2012-13 में यह 1.3 फीसदी था। हालांकि, देश के विकास सूचकांक में इसका योगदान 75 फीसदी है।