जापान की एयरकंडीशनर बनाने वाली कंपनी डायकिन इंडिया लिमिटेड अपनी नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी वीआरवी 4 के साथ भारत के एसी बाजार में शीर्ष कंपनी बनने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी भारत में बेचे जाने वाले अपने उत्पाद तैयार करने में 90 फीसदी लोकल सोर्सिंग की क्षमता हासिल कर चुकी है।
नई टेक्नोलॉजी के साथ कंपनी की रणनीति भारत में सस्ते और बिजली की कम खपत वाले एसी मुहैया कराने की है। इससे उसे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ाने में आसानी होगी। कंपनी भारत में अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी और अगले दो वर्ष में डीलरों की संख्या बढ़ा कर 4,000 करेगी।
डायकिन देश के एसी बाजार में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए उत्पादन क्षमता को दोगुना भी करने की योजना बना रही है। मौजूदा समय में कंपनी की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 5 लाख यूनिट है। इन मुद्दों पर डायकिन इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर कंवल जीत जावा से अमर उजाला के संवाददाता महेंद्र सिंह ने बात की है। पेश हैं प्रमुख अंश-
मौजूदा त्योहारी सीजन में एसी की मांग कैसी रही?
त्योहारी सीजन में अब तक की अवधि को देखें, तो एसी की मांग उत्साह बढ़ाने वाली नहीं रही है। लेकिन देश में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नई और मजबूत सरकार आई है। नई सरकार स्किल, स्केल और स्पीड के फार्मूले पर काम कर रही है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में देश में अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ एसी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। नई सरकार ने एफडीआई के मोर्चे पर कई सकारात्मक कदम उठाए हैं और एफडीआई के प्रवाह पर इसका सकारात्मक असर दिखने भी लगा है।
मौजूदा समय में भारत के एसी बाजार में डायकिन की बाजार हिस्सेदारी 12-13 फीसदी है। बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की आपकी क्या रणनीति है?
भारत के एसी बाजार पर हमने 2011 से ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है। पहले हमारा फोकस कॉमर्शियल एसी के बाजार पर था। अब हम भारत में आवासीय एसी के सेगमेंट में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। भारत में नंबर वन बनने के लिए जरूरी है कि हम 100 फीसदी लोकल सोर्सिंग करें। जापान और जर्मनी से इक्युपमेंट आयात कर हम भारत में नंबर वन नहीं बन सकते हैं। हमने इस दिशा में काफी हद तक सफलता हासिल की है। हमारा नीमराना, राजस्थान में प्लांट है और हमारे उत्पाद 90 फीसदी लोकल सोर्सिंग पर तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा हम अगले एक-डेढ़ वर्ष में अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा कर दोगुना करेंगे। मौजूदा समय में हमारी उत्पादन क्षमता सालाना 5 लाख यूनिट है। हमारा लक्ष्य इसे बढ़ा कर 10 लाख करना है।
आप भारत के घर-घर में एसी पहुंचाने की बात कर रहे हैं, लेकिन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बिजली बहुत कम आती है। इस बारे में आप का क्या कहना है?
हमने भारत में नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी वीआरवी 4 लांच की है। इसके कई सारे फायदों के साथ एक फायदा यह भी है कि यह बहुत कम ऊर्जा का खपत करती है। इसके जरिए हमारा एसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में 31 से 70 फीसदी तक कम बिजली खर्च करेगा। हम टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी एसी पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। हम लोगों को एसी से होने वाले फायदों, मसलन मच्छर, मलेरिया और दमे से बचाव, उत्पादकता बढ़ने जैसे फायदों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। अगर लोग दो घंटे एसी चलाएंगे तो कमरा अगले दो घंटे अपने आप ठंडा रहेगा। इसके अलावा हम लोगों को सस्ता एसी मुहैया कराएंगे, जो लोगों की पहुंच में होगा। 90 फीसदी लोकल सोर्सिंग की बदौलत हम ऐसा करने में सक्षम हैं।
भारत के छोटे शहरों में पहुंच बढ़ाने के लिए नेटवर्क बढ़ाने की कोई योजना है?
निश्चित तौर पर। मौजूदा समय में देश भर में हमारे 2,500 डीलर है। अगले दो वर्ष में हम डीलरों की संख्या बढ़ा कर 4,000 से अधिक करेंगे। इसके अलावा हमारे उत्पाद इनोवेशन से भरपूर हैं। इससे हमारे लिए लोगों के बीच पैठ बनाने में आसानी होगी। टियर-2 शहरों में पहले से हमारे डीलरों का नेटवर्क है। हम इस नेटवर्क का विस्तार कर गांव-गांव तक पहुंचने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मेक इन इंडिया के तहत कंपनियां भारत में उत्पाद बनाएं। इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए ?
केंद्र सरकार को इसके लिए सबसे पहले श्रम सुधारों की दिशा में काम करना चहिए। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे अहम है। मोदी सरकार ने इन दोनों मुद्दों पर काम भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा हाल में महंगाई में नरमी रही है। ऐसे में सरकार को ब्याज दरों में कमी पर भी ध्यान देना चाहिए।