सौ करोड़ या उससे ज्यादा का कारोबार करने वाली माइक्रोफाइनेंस कंपनियां 1 अप्रैल से अपने ब्याज मार्जिन को अधिकतम 10 फीसदी के दायरे में ही रख सकेंगी। फिलहाल मार्जिन की यह सीमा 12 फीसदी है।
ऐसे में बैंकों से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर और अधिकतम सीमा को देखते हुए नए साल में बड़ी माइक्रोफाइनेंस कंपिनयों की तरफ से ब्याज दरों में कमी की जा सकती है।
इसके अलावा छोटी कंपनियों को यह फायदा मिलेगा कि वह ऊंची ब्याज दरों के बावजूद प्राथमिकता क्षेत्र का लाभ ले सकेंगी। आरबीआई के निर्देश पर इक्रा की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 लागू होने से देश में काम कर रही करीब 90 फीसदी माइक्रोफाइनेंस कंपनियां, जिन पर 10 फीसदी ब्याज मार्जिन की सीमा आरबीआई ने तय की है, उनके लाभ पर ज्यादा असर नहीं होगा।