यदि किसी कंपनी का कर्ज वापस करने के मामले में रिकॉर्ड खराब है, तो उसके लिए बैंक से कर्ज लेना अब और मुश्किल हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने कॉरपोरेट लोन के बढ़ते डिफॉल्ट की वजह से सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वह कर्ज देने के पहले कंपनी की पूरी जांच-पड़ताल करे। नए निर्देश के तहत बैंक को कंपनी द्वारा दूसरे बैंकों से लिए गए कर्ज की पूरी जानकारी लेना जरूरी होगा।
एक सार्वजनिक बैंक के कार्यकारी निदेशक ने अमर उजाला को बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए नए निर्देश लागू कर दिए हैं। इसके तहत यदि किसी कंपनी को बैंक कर्ज देता है, तो उसके पहले उसके रिकॉर्ड की पूरी जानकारी दूसरे बैंकों से लेनी होगी। यानी कि कंपनी ने दूसरे बैंकों से कितना कर्ज लिया है।
उन बैंकों में कंपनी का कर्ज वापस लौटाने का रिकॉर्ड क्या है। अधिकारी के अनुसार पूरी जानकारी लेने के बाद ही अब बैंक कंपनी को कर्ज स्वीकृत कर सकेंगे। अधिकारी ने बताया कि अभी यह शर्त अनिवार्य नहीं थी। आरबीआई ने अब इसे अनिवार्य कर दिया है।
कॉरपोरेट लोन में बढ़ते डिफॉल्ट को देखते हुए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग, स्टील, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई प्रमुख सेक्टर जहां से बैंकों को अपने कर्ज वापस मिलने में दिक्कत आ रही है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती और बढ़ते डिफॉल्ट की वजह से सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2012 में 3.3 फीसदी पर पहुंच गया है। यह मार्च 2011 में 2.4 फीसदी पर था।
यहीं नहीं भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का सकल एनपीए सितंबर 2012 तक चार फीसदी को भी पार कर गया है। इसके अलावा कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग का आंकड़ा भी इस साल 64 हजार करोड़ रुपये सितंबर 2012 तक पहुंच चुका है।