रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने उम्मीद जताई है कि मांग में तेजी आने से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 2013-14 में बढ़कर 6.7 फीसदी पर पहुंच सकती है। इसके साथ ही क्रिसिल की रिपोर्ट में देश का राजकोषीय घाटा भी 5.8 फीसदी से घटकर 2013-14 में 5.5 फीसदी पर आने की उम्मीद जताई गई है।
एजेंसी की शोध शाखा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की जीडीपी की विकास दर वित्त वर्ष 2012-13 के 5.5 फीसदी स्तर से बढ़कर 2013-14 में 6.7 फीसदी पर पहुंच सकती है। ऐसा मांग में एक बार फिर से तेजी आने के चलते होगा। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि क्षेत्र में कम ब्याज दरों और सरकार द्वारा इस सेक्टर में खर्च किए जाने के चलते कृषि उत्पादों की मांग में तेजी आएगी। क्रिसिल ने जल्द ही ब्याज दरों में कमी का अनुमान जताते हुए कहा है कि आर्थिक विकास दर में सुस्ती के लिए जिम्मेदार बताई जाने वाली रिजर्व बैंक की ऊंची ब्याज दरों में भी कमी आएगी।
महंगाई के नीचे आने पर आरबीआई ब्याज दरों में एक फीसदी तक की कटौती कर सकता है। रिपोर्ट में महंगाई दर 7.7 फीसदी से घटकर अगले वित्त वर्ष के दौरान 7 फीसदी पर आ जाने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में रिजर्व बैंक के लिए मूल दरों में कटौती करना संभव हो सकेगा। गौरतलब है कि आरबीआई पिछली मौद्रिक समीक्षा में महंगाई के सुविधाजनक स्तर तक घटने पर ब्याज दरों में कटौती के संकेत दे चुका है।
क्रिसिल की ओर से जीडीपी में बढ़ोतरी का यह अनुमान ऐसे समय में सामने आया है, जबकि सरकार के बढ़ते घाटे और ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता के चलते आर्थिक स्तर पर कमजोरी का माहौल दिखाई दे रहा है। इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक अक्तूबर में मौद्रिक नीति की समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.5 फीसदी से घटाकर 5.7 फीसदी कर चुका है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां भी विकास दर में तेजी लाने के लिए सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने के लिए सचेत कर रही हैं।