त्योहार भी वाहनों की बिक्री की रफ्तार नहीं दिला पा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस बार गाड़ियों के लिए कर्ज की मांग में बढ़ोतरी पिछले साल के मुकाबले कम रही है।
रिजर्व बैंक के अनुसार मार्च से सितंबर तक वाहनों के लिए कर्ज की रफ्तार केवल 6.7 फीसदी की दर से बढ़ी है। साल 2012 में यह दर 8.4 फीसदी रही थी।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2013 में वाहन लोन का आउटस्टैण्डिंग 1,111 अरब रुपए का था, जो कि सितंबर तक केवल 75 अरब रुपये बढ़ा है।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री एसोसिएशन सिआम के आंकड़ों के अनुसार साल 2013 के अप्रैल से सितंबर महीने में कारों की बिक्री में 4.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जो कि साल 2002-03 के बाद किसी वित्त वर्ष के पहले छह महीने की सबसे बड़ी गिरावट है।