भ्रामक विज्ञापनों के जरिये उपभोक्ताओं को दिगभ्रमित करने वाली कंपनियों की शिकायत करना अब आसान हो गया है। केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक वेबसाइट की शुरुआत की है, जिस पर ऐसे विज्ञापनों की शिकायत की जा सकती है। इसमें एडवर्टाइजिंग स्टेंडर्ड काउंसिल आफ इंडिया (एएससीआई) को भी भागीदार बनाया गया है।
एएससीआई के अध्यक्ष नरेन्द्र अंबवानी ने अमर उजाला को बताया कि बुधवार को केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामबिलास पासवान ने ग्रीवांस अगेंस्ट मिसलीडिंग एडवर्टीजमेंट (गामा डॉट गोव डॉट इन) पोर्टल की शुरुआत की।
6 क्षेत्रों को प्राथमिकता
इस पर यूं तो किसी भी क्षेत्र से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत की जा सकती है, लेकिन प्राथमिकता में छह क्षेत्रों को रखा गया है, जिनमें कृषि एवं खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, वित्तीय सेवाएं और ई-कॉमर्स शामिल हैं।
इस पोर्टल में किसी भी माध्यम से प्रसारित-प्रचारित भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत की जा सकती है चाहे वह प्रिंट माध्यम में हो, पैकेजिंग में हो, इंटरनेट पर हो या आउटडोर मीडिया, वाल पेंटिंग, पोस्टर या बिल बोर्ड के माध्यम से हो।
ऐसे चलेगी प्रक्रिया
गामा डॉट गोव डॉट इन पर तीन स्तरों में भ्रामक विज्ञापनों का निस्तारण होगा। सबसे पहले तो इसे एएससीआई के पास भेजा जाएगा, जहां नियमानुसार छानबीन की जाएगी और उसका निदान सुझाया जाएगा।
इस पर यदि विज्ञापन जारी करने वाले ने कदम नहीं उठाया तो उसे उपभोक्ता मामले के संयुक्त सचिव के पास भेज दिया जाएगा।
यह दूसरा स्तर हुआ। यहां भी यदि मामला नहीं सुलझा तो फिर तीसरे स्तर में मामला उस क्षेत्र के नियामक के पास भेज दिया जाएगा। एएससीआई विज्ञापन जगत का एक स्वयंसेवी संगठन है जो इस क्षेत्र में 1985 से काम कर रहा है।