मनमाने दामों पर बेबी फूड बेच रही कंपनियों को भी स्टैंडर्ड पैकेजिंग कानून के तहत अपने उत्पादों की बिक्री करनी होगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले के मंत्रालय ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत बेबी फूड्स की पैकिंग स्टैंडर्ड पैकेजिंग कानून के अनुसार करना अनिवार्य किया जाएगा। सरकार को संसदीय समिति ने बेबी फूड निर्माता कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाने के संबंध में सुझाव दिए हैं।
उपभोक्ता मामलो के मंत्री प्रो. केवी थॉमस ने बताया कि मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध बेबी फूड्स की पैकिंग एवं मूल्य में एकरूपता नहीं है। निर्माता कंपनियां लुभावने विज्ञापनों के जरिए अपने उत्पादों के मनचाहे दाम वसूल रही हैं।
बाजार में एक वर्ष से छोटे बच्चों से लेकर बारह वर्ष तक के बच्चों के खाद्य पदार्थों की बिक्री की जा रही है। हालांकि बच्चों के खाद्य पदार्थ निर्माताओं में ज्यादातर बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं। यह कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने का दावा करते हुए स्टैंडर्ड पैकेजिंग कानून का विरोध कर रही हैं। मगर सरकार ने इसके विरोध को दरकिनार करते हुए बेबी फूड्स को भी इस कानून के दायरे में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
थॉमस ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर से देश में विधिक माप डिब्बाबंद वस्तु अधिनियम 2011 लागू हो चुका है। मगर इसके दायरे में अभी बेबी फूड्स, खाद्य तेल, चाय, चिप्स, नमकीन, नूडल्स सहित बच्चों की अन्य खाद्य वस्तुएं शामिल नहीं हैं।
पिछले महीने खाद्य मामलों की संसदीय समिति ने बच्चों के खाद्य उत्पाद, खाद्य तेल और चाय आदि को भी इसमें शामिल किए जाने की सिफारिश की थी। स्टैंडर्ड पैकिंग के तहत बेबी फूड, बिस्कुट, कॉफी, चाय, साबुन आदि की पैकिंग कम से कम 25 ग्राम से शुरू होगी और इसके गुणांक में यानि 50, 75, 100 या 125 में बड़ी पैकिंग हो सकेगी।
इसी प्रकार ब्रेड की पैकिंग 50 ग्राम से शुरू होगी और 100, 150, 200 से लेकर 500 ग्राम तक अधिकतम हो सकेगी। खाद्य तेल, मिल्क पाउडर, डिटर्जेंट की पैकिंग कम से कम 50 ग्राम में अनिवार्य है। हाथ धोने के साबुन की छोटी पैकिंग 15 ग्राम, खाने का नमक दस ग्राम और सॉफ्ट ड्रिंक की 65 ग्राम तय की गई है। मिनरल वाटर का बड़ा पैक अब 20 लीटर के बजाए 25 लीटर तक उपलब्ध हो सकेगा।