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ग्रामीण बाजार में तेजी से कारोबार का विस्तार करेगी कोका-कोला

Sun, 07 Sep 2014 09:33 PM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला, दिल्ली
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कोका-कोला इंडिया ग्रामीण बाजार की बढ़ती मांग को देखते हुए अब गांव-गांव तक अपने कोल्ड ड्रिंक्स पहुंचाने पर फोकस कर रही है। इसके लिए कंपनी अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बढ़ा रही है। कंपनी ग्राहकों की मांग के अनुसार 100 मिलीलीटर से लेकर 750 मिलीलीटर की पैकेजिंग में उत्पाद पेश कर रही है। कंपनी की भारत को लेकर क्या योजनाएं हैं, इस बारे में कोका-कोला इंडिया और दक्षिण पश्चिम एशिया के प्रेसिडेंट वेंकटेश किनी ने अमर उजाला के संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव से बातचीत की है। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश-
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कोका-कोला के लिए ग्रामीण भारत में अपनी पैठ बनाना एक अहम चुनौती है, क्या ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग उत्पाद लाने पर फोकस है?
कोका-कोला इंडिया की अपने उत्पादों के जरिए मेड इन इंडिया और मेड फॉर इंडिया की पहचान है। हमारी पूरी रणनीति इसी के ईद गिर्द रहती है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में थम्स अप, लिम्का, माजा, मिनट मेड नींबू फ्रेश, माजा मिल्की डिलाइट और ग्लोबल उत्पाद कोका-कोला, स्प्राइट, फैंटा आदि हैं। हमारा फोकस अफोर्डेबल कीमत में उत्पाद देना है। इसी के तहत हम ग्राहक को 200 मिली लीटर उत्पाद 10 रुपये में उपलब्ध कराते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में हमारा जोर तेजी से डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बढ़ाने पर है। एफएमसीजी क्षेत्र में देश का 30 फीसदी यानी 22 लाख रिटेल आउटलेट कोका-कोला के पास है। हमारे लिए नई चुनौती यह है कि कैसे हम ठंडे उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाए। क्योंकि, हमारे उत्पाद ठंडे होने की स्थिति में सबसे ज्यादा बिकते हैं।

आपका ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क बढ़ाने पर जोर हैं, ऐसे में पैकेजिंग में किस तरह का बदलाव करेंगे। आपके कुल कारोबार में ग्रामीण बाजार की क्या हिस्सेदारी होने का लक्ष्य है?
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हम उत्पाद की सैंपलिंग और उसके डिस्ट्रिब्यूशन में नए माध्यम अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी के तहत माजा टेट्रा फिनो पैकेजिंग में पेश कर रहे हैं। जो कि 100 मिलीलीटर में उपलब्ध है। कंपनी ने इसकी कीमत 7 रुपये रखी है। इसी तरह बड़े साइज की पैकेजिंग का विकल्प भी हम दे रहे हैं। जिसमें 400 मिलीलीटर और 750 मिलीलीटर पैकिंग का विकल्प है। इसके जरिए हम खास तौर से अपनी पहुंच बढ़ाएंगे। जहां तक ग्रामीण बाजार की हिस्सेदारी का सवाल है, तो हमारे कुल वॉल्यूम में इसका शेयर एक तिहाई है। जिस तरह बाजार बढ़ रहा है, उसे देखते हुए ग्रामीण बाजार की हिस्सेदारी 40-45 फीसदी पर पहुंच सकती है।

स्वास्थ्य को लेकर लोगों में काफी जागरूकता बढ़ी है, ऐसे में इस सेगमेंट को लेकर कंपनी की क्या योजना है?
हम अभी भी मौजूदा सेगमेंट में काफी मांग देख रहे हैं। हम उपभोक्ता को उसकी जरूरत के मुताबिक उत्पाद दे पा रहे हैं, इसी वजह से थम्स अप और स्प्राइट दो सबसे ज्यादा बिकने वाले सॉफ्ट ड्रिंक हैं। वहीं, माजा सबसे ज्यादा बिकने वाला जूस ड्रिंक है। यह ब्रांड अपनी उच्च गुणवत्ता और स्वाद की वजह से साख बनाए हुए हैं।

मौसम आपके कारोबार में अहम भूमिका अदा करता है, ऐसे में इसकी निर्भरता कम करने के लिए कंपनी किस तरह के उत्पाद विकसित कर रही है?
हम एक अहम बदलाव देख रहे हैं, कि उपभोक्ता पूरे साल पेय उत्पादों की मांग कर रहा है। ऐसा उसकी जीवन शैली में हो रहे बदलावों और बढ़ती जरूरतों के कारण हो रहा है। इसके अलावा अब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर ज्यादा भ्रमण कर रहे हैं। हमारे उत्पाद इन परिस्थितियों के मुताबिक उपभोक्ता तक सुरक्षित रूप से पहुंच रहे हैं। जिसे देखते हुए हमारा फोकस इस रणनीति के जरिए उपभोक्ता की जरूरत पूरी करना है।

हाल ही में बहुत सी भारतीय कंपनियां पारंपरिक पेय उत्पादों के जरिए बाजार में पकड़ बनाने की कोशिश में है, ऐसे में इस बाजार के लिए आपकी क्या रणनीति है?
जैसा कि मैने पहले भी कहा है, कोका-कोला मेड इन इंडिया, मेड फॉर इंडिया के आधार पर काम करती है। इसके अलावा, हम भारतीय ग्राहकों की जरूरतों का लगातार आकलन करते रहते हैं। जिसके मद्देनजर कंपनी अपने गुड़गांव स्थित रिसर्च और डेवलपमेंट लैब में लगातार काम करती है। फीडबैक के आधार पर हम ग्राहकों के मुताबिक उत्पाद बनाने की कोशिश करते रहते हैं।
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