फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन ने बढ़ाई भारतीय सिंथेटिक टेक्सटाइल उद्योग की मुश्किलें

Sat, 04 Oct 2014 09:04 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
चीन से डंप हो रहे कच्चे माल ने भारतीय सिंथेटिक टेक्सटाइल उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही घरेलू कंपनियों के सामने बाजार में बने रहने का खतरा पैदा हो गया है। यह स्थिति एंटी डंपिंग शुल्क लगाए जाने के बाद है।
विज्ञापन


केमिकल्स एवं पेट्रोकेमिकल्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीपीएमए) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र खिलकर उन्हें उद्योग के सामने गहराते संकट और तथ्यात्मक स्थिति से अवगत कराया है। इसके साथ ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाने की मांग दोहराई है।

इस मामले में सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और मित्सुबिशी की एमसीसी पीटीए इंडिया कॉरपोरेशन की अर्जी के बाद जांच शुरू की थी। सरकार ने चीन, कोरिया, यूरोपीय यूनियन और थाईलैंड से आयात होने वाले प्यूरीफाइड टेरेफैटलिक एसिड (पीटीए) पर 19.05 से लेकर 117.09 डॉलर प्रति टन की (प्रभावी तौर पर 5-11 फीसदी देश विशेष पर निर्भर) की एंटी डंपिंग शुल्क लगाया था। पीटीए का इस्तेमाल पॉलिस्टर स्टेपल फाइबर (पीएसएफ), पॉलिस्टर फिलामेंट यार्न (पीएफवाई) और फिल्म बनाने में किया जाता है।
विज्ञापन


इस साल जुलाई अगस्त के दौरान पीएफएस का आयात पिछले साल के 4,441 टन से तीन गुना बढ़कर 16,785 टन हो गया। इसी तरह पिछले 2 महीनों में विदेशों से पीएफवाई का आयात 130 फीसदी बढ़कर 8,965 टन हो गया। चीन के बने सामान हांगकांग, नेपाल, सिंगापुर, थाईलैंड और कुछ मामलों में श्रीलंका के रास्ते भी भारत आते हैं। घरेलू उद्योग और कस्टम सूत्रों के मुताबिक इन देशों से चीनी सामान गलत घोषणाओं और कई फर्जी तरीकों से आते हैं।

सामान्य से कम मूल्य पर किया था पीटीए का निर्यात
एंटी डंपिंग शुल्क लगाने से पहले सरकार की शुरुआती जांच में पता चला था कि चीन, कोरिया, यूरोपीय यूनियन और थाईलैंड से ‘सामान्य से कम मूल्य’ पर पीटीए का निर्यात किया गया। जांच के मुताबिक इस डंपिंग से घरेलू उद्योग को नुकसान हुआ। हालांकि, पीटीए का इस्तेमाल करने वालों ने जांच रिपोर्ट का विरोध किया। सिर्फ फैब्रिक की ही बात करें तो 2011-12 में चीन से आयात 2010-11 के 47 करोड़ डॉलर से बढ़कर 65.4 करोड़ डॉलर हो गया। 2012-13 में यह और बढ़कर 71.6 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। ये चीन से सीधा आयात के आंकड़े हैं।

घरेलू मांग घटने से आक्रामक हुआ चीन
चीन की घरेलू मांग पहले के मुकाबले उतनी रफ्तार से नहीं बढ़ रही है, ऐसे में वो और आक्रामक हो रहा है। हाल के रुझानों से चीन में मांग में स्थिरता के संकेत मिले हैं। ऐसे में चीन ने भारत जैसे बड़े बाजारों में अपना माल डंप करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। चीन का इरादा यह भी है कि भारतीय घरेलू उत्पादकों की ओर से सिंथेटिक टेक्सटाइल के लिए कच्चे माल के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बिलकुल खत्म कर दी जाए, ताकि बाद में चीनी उत्पादक अपनी शर्तें थोप सकें।

चीन समर्थक उद्योग कर रहे हैं लांबिंग
सिंथेटिक टेक्सटाइल क्षेत्र में चीन समर्थक उद्योगों की लॉबी भी काफी मजबूत है। भारतीय सिंथेटिक उद्योग को लंबे समय में नुकसान के खतरे के बावजूद ये एंटी-डंपिंग ड्यूटी हटाने के लिए भारी लॉबिंग कर रहे हैं। लंबे समय में चीनी कंपनियां इनके लिए मनमर्जी से कीमतें और शर्तें थोपेंगी।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें