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नहीं होता मनी लांडरिंग में पार्टिसिपेटरी नोट्स का इस्तेमाल

Fri, 08 Mar 2013 04:19 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि सेबी और प्रवर्तन निदेशालय के पास पार्टिसिपेटरी नोट्स (पीएन) को लेकर ऐसा कोई उदाहरण उपलब्ध नहीं है, जिसमें यह बात सामने आई हो कि उसका इस्तेमाल मनी लांडरिंग के लिए किया गया है। पार्टिसिपेटरी नोट्स भारतीय शेयर बाजारों में एफआईआई के निवेश का एक जरिया है।
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लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि सेबी और प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में नियामक की भूमिका में हैं। उनके पास इस बात का कोई दृष्टांत नहीं है कि पीएन का इस्तेमाल मनी लांडरिंग के लिए किया गया।

दिसंबर 2012 के आखिर में पीएन के लिए घरेलू शेयर बाजारों में 1.51 लाख करोड़ रुपये का रहा। जबकि, 2011 में पीएन की कुल वैल्यू 1.38 लाख करोड़ रुपये रही थी।
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निवेशकों के लिए क्षतिपूर्ति की नहीं है कोई व्यवस्था
चिदंबरम ने कहा कि शेयर बाजार में निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं। जिनमें जालसाज कंपनियों के निलंबन तक का प्रावधान शामिल हैं। लेकिन, शेयर बाजार में निवेशकों को क्षतिपूर्ति देने की कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि शेयर बाजार एक निजी कंपनी इकाई हैं और इनमें कारोबार जोखिमपूर्ण होता है।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रैल 2009 से फरवरी 2013 के बीच 1125 कंपनियों को ट्रेडिंग से निलंबित किया गया है। इन कंपनियों की ट्रेडिंग पर लिस्टिंग समझौते की अनदेखी और लिस्टिंग शुल्क का भुगतान नहीं करने के कारण रोक लगाई गई।
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