पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बीमा संशोधन विधेयक पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा गंभीरता से विचार करने पर संतोष जताया है। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने को मंजूरी वाले इस बिल पर चिदंबरम ने कहा कि प्रत्येक सरकार को अपनी पूर्ववर्ती सरकार के कार्यों को पूरा करना चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि यह विधेयक संयुक्त प्रगतिशील (संप्रग) सरकार की दूरदर्शी नीति का हिस्सा है, जिसके अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में उनकी सरकार ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने के लिए बीमा संशोधन विधेयक लाया था, लेकिन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के विरोध की वजह से इसे पारित नहीं करवाया जा सका। सरकार ने 4 अगस्त को राज्यसभा में बीमा संशोधन विधेयक पर चर्चा कराने का प्रस्ताव किया है। विधेयक के संसद से पारित हो जाने के बाद बीमा कंपनियां विदेशी सहयोगी कंपनियों से पर्याप्त पूंजी जुटा सकेंगी।
चिदंबरम ने कहा कि इस विधेयक पर पिछले दो वर्षों से जारी उठापटक के बाद मुझे उम्मीद है कि संसद के चालू सत्र में यह पारित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बीमा विधेयक पर अगस्त 2012 में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के साथ बैठक हुई थी और संप्रग सरकार उनकी सलाह मानने को तैयार भी हो गई थी, लेकिन दिसंबर 2013 में भारतीय जनता पार्टी ने इसे पारित कराने पर गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने कहा कि यह संप्रग सरकार की ही पहल थी, जिसके बेहतर परिणाम अब दिखने लगे हैं। इसके तहत आनलाइन कारोबार करने वाली अमेरिकी कंपनी अमेजन के दो अरब डॉलर के निवेश और इंटरनेशनल कोल वेंचर लिमिटेड (आईसीवीएल) के मोजांबिक में तीन कोयला खदानों के अधिग्रहण की घोषणा शामिल हैं।