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एनबीएफसी के रिस्क वेटेज नियमों में हो सकता है बदलाव

Fri, 15 Feb 2013 11:21 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के रिस्क वेटेज नियम आसान कर सकता है। इसके तहत एनबीएफसी के लिए रिजर्व बैंक रिस्क वेटेज तय करने के अलग-अलग वर्ग बना सकता है। जिससे कि कम जोखिम का कारोबार करने (वाहनों को फाइनेंस, उपकरण फाइनेंस) वाली कंपनियों को रिस्क वेटेज के लिए कम पूंजी रखनी पड़ेगी, जबकि ज्यादा जोखिम रखने वाले कारोबार (रीयल एस्टेट) पर ज्यादा पूंजी रखने का प्रावधान कर सकता है।
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सूत्रों के अनुसार आरबीआई इस संबंध में एनबीएफसी के लिए जारी होने वाली नई गाइड लाइन में प्रावधान करने पर विचार कर रहा है। यदि वर्ग के आधार पर निर्धारण होता है तो रीयल एस्टेट सेक्टर आदि का कारोबार करने वाली फाइनेंस कंपनियों को 150 फीसदी तक रिस्क वेजेट रखना पड़ सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में इस संबंध में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है, जिसमें रिस्क वेटेज संबंधी नियमों में बदलाव की मोटे तौर पर सहमति बनी है। इसके पहले रिजर्व बैंक द्वारा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए जारी ड्रॉफ्ट रिपोर्ट में कंपनियों को रिस्क वेटेज को 150 फीसदी तक करने का प्रावधान करने की बात कही गई है। अभी कंपनियों को रिस्क वेटेज के तहत 100 फीसदी राशि का प्रावधान करना पड़ता है।
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बैठक में भाग लेने वाले एक प्रतिनिधि ने बताया कि रिस्क वेटेज तय करने के लिए कारोबार के जोखिम के आधार पर वर्ग बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें कम जोखिम वाले कारोबार पर कम रिस्क वेटेज और अधिक जोखिम वाले कारोबार पर ज्यादा जोखिम तय करने की बात कही गई है। इसके पहले ड्रॉफ्ट रिपोर्ट में केवल ज्यादा जोखिम वाले कारोबार की रिस्क वेटेज बढ़ाने की बात कही गई थी। उसमें कम जोखिम का वर्ग बनाने की बात नहीं की गई थी।

अधिकारी ने बताया कि नए प्रस्ताव के तहत एसेट फाइनेंस करने वाली कंपनियां, उपकरण फाइनेंस करने वाली कंपनियों को मौजूदा 100 फीसदी की जगह 50 फीसदी रिस्क वेटेज तय करने की बात की गई है। एसेट फाइनेंस कंपनियां प्रमुख रुप से वाहनों को फाइनेंस करती है, जिस पर जोखिम कम होता है। ऐसा इसलिए है कि वाहन ही कंपनियों के पास गारंटी के रूप में होते हैं। ऐसे में डिफॉल्ट के समय रिकवरी का विकल्प होता है।

इसी तरह उपकरण फाइनेंस करने वाली कंपनियों के लिए उपकरण ही गारंटी के रूप में होता है। जहां पर जोखिम कम है। क्या है रिस्क वेटेज- कंपनियों को अपने दिए गए कर्ज पर जोखिम को देखते हुए उसी के बराबर पूंजी रखनी पड़ती है। ऐसे में कम रिस्क वेटेज रखने पर कंपनियों को ज्यादा कर्ज देने का मौका मिलेगा।
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