इस बार चुनाव आचार संहिता का खौफ केंद्र सरकार के विभिन्न्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों में कुछ ज्यादा ही दिख रहा है। लोक सभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया था कि सरकार का काम सुचारु रूप से चलता रहेगा और जरूरी फैसले लिए जाएंगे।
लेकिन हालत यह है कि चुनाव आयोग पर सरकारी फैसलों को मंजूरी देने का बोझ बढ़ता जा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग की अनुमति के बाद रिजर्व बैंक ने नए बैंकिंग लाइसेंस जारी कर दिए हैं। वहीं, सरकार को नए कंपनी कानून लागू करने की भी मंजूरी मिल गई। लेकिन आयोग में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों का अंबार लगा है।
अब तक 150 से ज्यादा प्रस्ताव चुनाव आयोग को मिल चुके हैं। इनमें बड़ी तादाद हाईवे परियोजनाओं की है। यूपीए के पूरे कार्यकाल में हाईवे निर्माण में पिछड़ी रही सरकार अब अपने आखिरी दिनों में सक्रिय हुई है।
चुनाव आयोग दे रहा है योजनाओं को मंजूरी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, करीब आधा दर्जन हाईवे योजनाओं को चुनाव आयोग की हरी झंडी मिल चुकी है, जबकि इतनी ही योजनाओं को मंजूरी का इंतजार है।
खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को कैबिनेट के निर्देश के बाद कई प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजने पड़े हैं। इनमें भारतीय खाद्य निगम में स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति, बांग्लादेश के जरिए त्रिपुरा में खाद्यान्न की आपूर्ति और खुले बाजार में गेहूं की बिक्री के नियमों में संशोधन के फैसले शामिल हैं।
चुनाव आयोग का बढ़ गया काम
राज्य सरकारों की ओर से बिजली की दरें बढ़ने संबंधी फैसलों की बाढ़ ने चुनाव आयोग पर काम का बोझ बढ़ा दिया है। आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जितनी भारी तादाद में विभिन्न महकमे अपने फैसलों को मंजूरी के लिए चुनाव आयोग के पास भेज रहे हैं, उनकी समीक्षा के लिए मौजूदा अधिकारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
कई प्रस्ताव इतने पेचीदा हैं कि उन पर निर्णय लेने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को मामले समझाने के लिए बुलाया जा रहा है। इससे चुनाव आयोग का काम काफी बढ़ गया है।