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सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाने को हरी झंडी

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मोदी सरकार ने अपने पहले विनिवेश कार्यक्रम की शुरूआत कर दी है। इसके तहत सरकार शुरू में कोल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी लिमिटेड और एनएचपीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी।
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बुधवार को कैबिनेट के आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने तीनों कंपनियों के विनिवेश योजना को मंजूर कर लिया है। इसके तहत कोल इंडिया लिमिटेड की 10 फीसदी हिस्सेदारी, ओएनजीसी की 5 फीसदी और एनएचपीसी की 11.36 फीसदी हिस्सेदारी सरकार बेचेगी।

सरकार को कोल इंडिया के विनिवेश से मौजूदा शेयर कीमतों के आधार पर करीब 22 हजार करोड़ रुपये, ओएनजीसी से 18000 करोड़ रुपये और एनएचपीसी से 2600 करोड़ रुपये की पूंजी मिलने की उम्मीद है।
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सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए 43 हजार 425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा 15000 करोड़ रुपये ऐसे सार्वजनिक उपक्रमों में से अपनी हिस्सेदारी बेचकर जुटाने का लक्ष्य रखा है, जहां उसकी अधिकतम हिस्सेदारी नही है।

कैसे बेचेगी हिस्सेदारी सरकार?

सरकार की कोल इंडिया लिमिटेड में 89.65 फीसदी, ओएनजीसी में 68.94 फीसदी और एनएचपीसी में 85.96 फीसदी हिस्सेदारी है। इन कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी ओएफएस (ऑफर फॉर सेल ) रुट के जरिए बेचेगी।

सीसीईए ने इसके अलावा बीमार या घाटे में चल रही केंद्र सरकार के 11 सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के लिए 287.67 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि एक सितंबर 2013 से लेकर मार्च 2014 के लिए स्वीकृत की गई है।

इसके अलावा काफी बोर्ड के समेकित विकास कार्यक्रम के तहत 950 करोड़ रुपये आवंटन को भी मंजूरी सीसीईए ने दी है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर अतिरिक्त लिक्विड बल्क टर्मिनल बनाने के प्रोजेक्ट की मंजूरी सरकार ने दी है। जिस पर करीब 2496 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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100 करोड़ लोगों का 2015 तक आधार कार्ड बनाने का लक्ष्य

मोदी सरकार ने यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आधार को आगे बढ़ाने का आधिकारिक रूप से फैसला कर लिया है। इसके तहत बुधवार को सीसीईए ने आधार प्रोजेक्ट के पांचवें चरण को मंजूर कर दिया है।

इस चरण में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में लोगों के आधार कार्ड बनाए जाएंगे। इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) को साल 2015 तक 100 करोड़ आधार कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया गया है।

सौ करोड़ के लक्ष्य में अभी तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रार के तहत 12 राज्यों में लोगों के बन चुके आधार कार्ड को भी शामिल किया गया है।

मोदी सरकार हाल ही में शुरू की गई जन-धन योजना को आधार कार्ड से जोड़कर नकद सब्सिडी और मनरेगा के वेतन को लोगों के खातों में पहुंचाना चाहती है।

देश में आधार कार्ड बनाने की शुरूआत साल 2010 से की गई थी। अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक 67.38 करोड़ लोगों को आधार नंबर दिए जा चुके हैं। इस पर अगस्त 2014 तक 4906 करोड़ रुपये का खर्च आ चुका है।
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