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सीक्रेट रूम में बनता है बजट, खोजी कुत्ते करते हैं उसकी निगरानी

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यूं तो हर व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपने खर्चो और कमाई को बैलेंस करने के लिए अच्छे से अच्छा बजट बनाने की कोशिश करता है। सरकार भी इसी तरह से अपने खर्चों और कमाई को बैलेंस करते हुए बजट पेश करने की कोशिश करती है, जिससे जनता को तो फायदा हो ही, साथ ही सरकार को घाटा भी न हो।
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सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत एक इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट होता है, जिसके अंदर बजट डिवीजन नाम का एक विभाग होता है। इसी विभाग की तरफ से सरकार के लिए बजट बनाया है, जिसकी प्रक्रिया हर साल अगस्त या सितंबर महीने में शुरू हो जाती है।

आपको बता दें कि बजट बनाने की प्रक्रिया बहुत ही गोपनीय होती है, जिसके लिए बजट प्रिंटिंग के समय करीब 100 लोगों को सप्ताह भर के लिए एक खास तरह की कैद मिलती है। साथ ही हथियारबंद सुरक्षाकर्मी और खोजी कुत्तों की फौज भी सुरक्षा के लिए मौजूद होती है।
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बजट प्रिंटिंग से जुड़े इन लोगों को घर जाने या किसी से फोन पर बात करने की भी अनुमति नहीं होती है। जब तक बजट पूरी तरह से प्रिंट नहीं हो जाता है, तब तक इन सभी लोगों को नॉर्थ ब्लॉक में ही रहना होता है।

गोपनीय होती है ये प्रक्रिया

बजट बनाने की प्रक्रिया तो अगस्त-सिंतबर से ही शुरू हो जाती है, लेकिन जनवरी की शुरुआत से ही ये सिक्योरिटी और अधिक बढ़ा दी जाती है।

जनवरी से ही नॉर्थ ब्लॉक की सुरक्षा की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस ब्यूरो, दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ के हाथ में चली जाती है। किसी भी बाहर के व्यक्ति को वित्त मंत्रालय में आने की इजाजत नहीं होती है।

फोन किए जाते हैं टैप

बजट से जुड़े जो भी लोग होते हैं, उनके फोन टैप किए जाते हैं, जिससे अगर कोई व्यक्ति बजट से जुड़ी कोई भी बात बाहर पहुंचाता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सके।

जब बजट प्रिंटिंग का काम शुरू होता है तो करीब 100 लोगों को इसके लिए वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में कैद कर दिया जाता है, जहां पर ये लोग बजट बनाने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

सीसीटीवी से होती है निगरानी

इन सभी लोगों को सप्ताह भर के लिए घरवालों से दूर इसी स्थान पर रहना होता है और साथ ही उन्हें किसी परिजन से बात तक करने की इजाजत नहीं होती है।

इस दौरान हर व्यक्ति पर सीसीटीवी के जरिए भी पूरी निगरानी रखी जाती है। सभी को फोन और इंटरनेट से दूर कर दिया जाता है।

वहां पर सिर्फ एक फोन उपलब्ध होता है, जिसमें सिर्फ इनकमिंग की सुविधा उपलब्ध होती है। इतना ही नहीं, उस फोन के पास हमेशा एक इंटेलिजेंस का आदमी खड़ा रहता है।

खोजी कुत्तों की फौज

कोई भी व्यक्ति चुपके से भी किसी तरह के मोबाइल फोन पर बात न कर सके, इसके लिए पूरे नॉर्थ ब्लॉक में ताकतवर मोबाइल फोन जैमर लगा दिए जाते हैं।

यहां पर हथियारों से लैस सुरक्षा कर्मियों के अलावा खोजी कुत्तों की जमात भी होती है, जिससे बजट की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ऐसी स्थिति में किसी की तबियत खराब होने पर भी उसे बाहर किसी डॉक्टर के पास न ले जाना पड़े, इसके लिए वहां पर हर समय डॉक्टरों की एक टीम मौजूद रहती है।
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खाने की भी होती है टेस्टिंग

यहां पर बजट की प्रिंटिंग, प्रूफ रीडिंग और ट्रांसलेशन का काम होता है। आपको बता दें कि अगर किसी आपातकालीन स्थिति में कोई व्यक्ति यहां से बाहर निकलता है तो उसके साथ इंटेलिजेंस का कोई न कोई व्यक्ति हमेशा रहता है।

इतना ही नहीं, यहां पर मौजूद व्यक्तियों के लिए जो खाना आता है, उसे भी टेस्टिंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, ताकि खाने में किसी प्रकार के जहर न मिलाए जाने की पुष्टि करके अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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