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बजट में रहेगी सस्ते मकानों की धूम

Mon, 07 Jul 2014 08:47 AM IST
नई दिल्ली/ अजीत सिंह
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केंद्र में नरेंद्र मोदी की मजबूत सरकार से जिन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं, उनमें रीयल एस्टेट सबसे ऊपर है। हाल के वर्षों में आर्थिक सुस्ती और नीतिगत अड़चनों की मार इस क्षेत्र पर भी पड़ी है। इसके अलावा रीयल एस्टेट की अपनी भी कई दिक्कतें हैं। बिल्डरों की मनमानी रोकने और खरीदारों के हितों के बचाव की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है जबकि कुछ मामलों में नियम-कायदों का बोझ बहुत ज्यादा है। इन चुनौतियों से निपटते हुए मोदी सरकार को 2022 तक सबके पास आवास का वादा निभाना है। आगामी 10 जुलाई को आने वाले बजट में डेवलपर्स और खरीदार दोनों के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। एक नजर इन उम्मीदों पर
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एफडीआई की सौगात

वित्तीय संकट से जूझ रहे रीयल्टी क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सौगात मिल सकती है। अभी कंस्ट्रक्शन से जुड़े कुछ क्षेत्रों में कई शर्तों के साथ एफडीआई की छूट है। रीयल एस्टेट में एफडीआई का रास्ता खोलने और नियमों में ढील की पूरी तैयारी हो चुकी है। इसके लिए कैबिनेट नोट भी बन चुका है। ज्यादा से ज्यादा आवास और अपेक्षाकृत सस्ते मकान बनाने की शर्त पर रीयल एस्टेट में एफडीआई को बढ़ावा दिया जा सकता है।

आवास को इंफ्रास्ट्रक्चर व इंडस्ट्री का दर्जा

सड़क, पोर्ट और बिजली की तर्ज पर आवास खासकर अफोर्डेबल हाउसिंग को भी इंफ्रस्ट्रक्चर और प्राथमिकता वाले उद्योग का दर्जा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही है। जीडीपी में करीब 6 फीसदी का योगदान करने वाले रीयल एस्टेट को अभी तक उद्योग के तौर पर बढ़ावा नहीं मिला। यह दर्जा मिलने से रीयल एस्टेट डेवलपर्स को बैंकों से कर्ज जुटाने में आसानी होगी।
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होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट

मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में सीधे कटौती की उम्मीद कम है। लेकिन निमभन और मध्य आय वर्ग के मकानों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए कुछ रियायतें दी जा सकती हैं। फिलहाल होम लोन के ब्याज पर सालाना 1.5 लाख रुपये की आयकर छूट मिलती है। इसमें कई साल से बदलाव नहीं हुआ है। आगामी बजट में यह छूट बढ़ने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा सस्ते मकानों को बढ़ावा देने के लिए खरीदारों व डेवलपरों के लिए कुछ अन्य रियायतों का ऐलान हो सकता है। इससे न सिर्फ खरीदारों को राहत मिलेगी बल्कि प्रॉपर्टी बाजार में मांग को भी बल मिलेगा।

सर्विस टैक्स में राहत

अभी कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी से जुड़ी कई सेवाओं पर सर्विस टैक्स की मार पड़ती है। इनमें काफी विसंगतियां हैं। मोदी सरकार अपने पहले बजट में रीयल एस्टेट सेवाओं से जुड़े सर्विस टैक्स प्रावधानों को सरल बनाने की पहल कर सकती है।

रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट

शेयर बाजार की तर्ज पर रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) छोटे निवेशकों को रीयल्टी बाजार में निवेश का मौका देगा। इससे प्रॉपर्टी बाजार में नकदी की किल्लत दूर हो सकती है। बजट में इसकी घोषणा लगभग तय मानी जा रही है।

जारी रह सकती है आयकर छूट

यूपीए सरकार ने पहली बार मकान खरीदने वालों को 25 लाख रुपये तक के कर्ज पर एक लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर छूट दी थी। इस छूट की अवधि 31 मार्च, 2014 को समाप्त हो चुकी है। मोदी सरकार इस छूट को जारी रखने पर विचार कर सकती है। महानगरों में मकानों की कीमतों को देखते हुए 25 लाख रुपये की सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।

कम हो सकता है टीडीएस का बोझ

सरकार 50 लाख रुपये से ऊपर की अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर एक फीसदी टीडीएस अनिवार्य कर चुकी है। प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर 50 लाख रुपये की इस सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।
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