डीएमके के साथ सरकार के सुलह के संकेत देने के बाद भी शेयर बाजारों में भरोसा नहीं लौट पाया। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 124 अंक गिरकर 19 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे 18,884 पर और नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 51 अंक गिरकर 5,694 पर बंद हुआ। दिग्गजों के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों की ज्यादा पिटाई हुई।
निफ्टी मिडकैप 2.5 फीसदी टूटा। बीएसई स्मॉलकैप में 2 फीसदी से ज्यादा अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से साफ संकेत न मिलने से घरेलू बाजारों ने मिलीजुली शुरुआत की। खुलते ही बाजारों ने नीचे का रुख किया और सेंसेक्स 19 हजार के नीचे फिसला।
डीएमके के साथ सरकार ने सुलह के संकेत दिए और साथ ही सरकार के सत्ता में बने रहना का भरोसा जताया। लेकिन, इससे बाजार की चिंता कम नहीं हुई। कारोबार के करीब एक घंटे के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। बाजार लगातार नीचे की ओर फिसलते चले गए। सेंसेक्स 130 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी ने 5,700 के नीचे गोता लगाया।
यूरोपीय बाजारों में मजबूती के बावजूद घरेलू बाजारों में गिरावट चली गई। सेंसेक्स 170 अंक टूटा। निफ्टी 5,680 के स्तर तक लुढ़का। बैंक निफ्टी 2013 के निचले स्तर पर पहुंचा। एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 2.5 फीसदी उछला। हेंगसेंग एक फीसदी चढ़ा। जबकि, कॉस्पी एक फीसदी टूटा।
ताइवान इंडेक्स और स्ट्रेट्स टाइम्स 0.5 फीसदी लुढ़क गए। यूरोपीय बाजारों में तेजी का रुझान रहा। उम्मीद की जा रही है कि साइप्रस को संकट से बाहर निकालने के लिए रूस मदद कर सकता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव बना रहा।