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बाजार में तेजी लौटने से बढ़ी है खुदरा निवेशकों की सक्रियता

Tue, 27 Jan 2015 09:04 AM IST
नई दिल्ली/ शिशिर चौरसिया
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शेयर बाजार में संवेदी सूचकांक के रोज नए कीर्तिमानों के बीच खुदरा निवेशकों की भी शेयर बाजार में सक्रियता बढ़ने की खबरें आने लगी हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक इस साल अप्रैल से अभी तक रीटेल इन्वेस्टर श्रेणी में 60 फीसदी ज्यादा कारोबार हुआ। हालांकि अब भी निवेशकों, खासकर खुदरा निवेशकों में वैसा विश्वास नहीं लौटा है, जैसा कि वर्ष 2008 से पहले था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बिजनेस डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख रवि वाराणसी का कहना है कि जो खुदरा निवेशक शेयर बाजार के बारे में गहराई से नहीं जानते है, लेकिन शेयर बाजार से जुड़ा रिटर्न चाहते हैं, उन्हें म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में शेयर बाजार से खुदरा निवेशक कैसे जुडें, इस मसले पर अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने रवि वाराणसी से विस्तृत बातचीत की। पेश है, इस बातचीत के अंश-
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यदि खुदरा निवेशकों की बात करें, तो शेयर बाजार में अभी क्या स्थिति है?
केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद से ही आप देख रहे होंगे कि शेयर बाजार में खुशनुमा माहौल बना है। इस समय विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है, तो खुदरा निवेशकों की भी सक्रियता बढ़ी है। हमने देखा है बीते अप्रैल से अभी तक खुदरा निवेशकों की 60 फीसदी भागीदारी बढ़ी है। पिछले आठ-नौ महीने में ही करीब 15 लाख नए निवेशकों ने डी-मैट अकाउंट खुलवाया है। यहां एक चीज गौर करने लायक यह है कि मैं जो नए अकाउंट का आंकड़ा दे रहा हूं, वह पुराने निवेशकों का नहीं, बल्कि नए निवेशकों का है। इन निवेशकों ने नए पैन नंबर के साथ खाता खुलवाया है और आप तो जानते हैं कि किसी व्यक्ति का पैन नंबर तो एक ही हो सकता है।

शेयर बाजार में इस समय स्थिति बेहद जटिल है और वही निवेशक पैसे बना पाता है जो इस क्षेत्र का माहिर है। ऐसे में खुदरा निवेशक क्या करें?
खुदरा निवेशक यदि शेयर बाजार से जुड़ा रिटर्न चाहते हैं, तो वे म्यूचुअल फंड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश करें। इनमें निवेश की गई राशि को शेयर बाजार में ही लगाया जाता है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि म्यूचुअल फंडों में निवेश का खर्च करीब 2.5 फीसदी होता है, जबकि ईटीएफ  का एक्सपेंस महज आधा (0.5) फीसदी होता है। इसलिए ईटीएफ  सस्ता पड़ता है। ईटीएफ  शुद्ध रूप से बाजार का रिटर्न देता है।
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बाजार से जुड़ा रिटर्न का मतलब?
यदि एनएसई ईटीएफ  की बात करें, तो हमारे निफ्टी सूचकांक में जो रिटर्न होगा, वही ईटीएफ  के निवेशकों को रिटर्न मिलेगा। इससे न कोई कम और न ज्यादा। लेकिन म्यूचुअल फंड में कोशिश की जाती है कि इंडेक्स को भी मात दें। यदि इंडेक्स में 16 फीसदी की बढ़ोतरी होती है, तो म्यूचुअल फंड के मैनेजर 20 फीसदी की रिटर्न हासिल करना चाहते हैं। हालांकि इस चक्कर में कई बार निवेशकों का नुकसान हो जाता है।

अलग-अलग ईटीएफ  में भी एक्सपेंस की दर अलग अलग होती है?
हॉं, अलग-अलग होती है। अभी हाल ही में रिलायंस ने निफ्टी से जुड़ा एक ईटीएफ  लांच किया है, जिसमें महज 0.23 फीसदी एक्सपेंस चार्ज किया जा रहा है। यही नहीं, यदि आप शेयर बाजार में फिजिकल ट्रेडिंग करते हैं, तो सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) का दर 0.1 फीसदी होता है, जबकि यदि आप ईटीएफ  लेते हैं तो इसमें एसटीटी की दर मात्र 0.001 फीसदी है। इसमें एक बार निवेश किया जा सकता है, या फिर सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये किस्तों में भी निवेश किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें निवेशक के हाथों में नकदी की उपलब्धता (लिक्विडिटी) है। यदि आप एक साल के बाद ईटीएफ  के यूनिट बेचते हैं तो यह लांग टर्म माना जाता है और इस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है।

खुदरा निवेशकों के बीच अभी भी इस प्रकार की जागरूकता नहीं है, इसके लिए क्या कर रहा है एनएसई?
यूरोप और अमेरिका में देखें तो वहां ईटीएफ  बेहद लोकप्रिय है। लेकिन यहां निवेशकों में जागरूकता का अभाव होने की वजह से ईटीएफ का लाभ कुछ ही फीसदी लोगों को मिल पा रहा है। जब लोगों को जानकारी नहीं होती है, तभी तो वे पाेंजी स्कीमों में फंसते हैं। इसलिए एनएसई विभिन्न शहरों में निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करता है। हर साल हम निवेशकों की जागरूकता के लिए हम ऐसे करीब ढाई हजार कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

शेयर बाजार के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आपने स्कूलों से भी करार किया है?
जी हां, हमने तमिलनाडु में ऐसा किया है। वहां कक्षा 8 और 9 के बच्चों को शेयर बाजार के बारे में प्रारंभिक जानकारी दी जाती है। इसके अलावा असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नगालैंड आदि राज्यों के साथ हमने समझौता किया है, ताकि 11वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों को शेयर बाजार के बारे में बता सकें। कई प्रतिष्ठित प्रबंध संस्थानों के साथ मिल कर हमने अलग से एमबीए कार्यक्रम भी शुरू किया है।
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