काला धन खपाने के लिए कुख्यात रियल एस्टेट सेक्टर को गाढ़े वक्त का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सरकार इससे जुड़े कानून में संशोधन करने जा रही है।
नए प्रावधानों के मुताबिक, रियल एस्टेट से जुड़ा कोई भी लेनदेन 20,000 रुपये तक ही नकद में हो सकेगा। इसके ऊपर की राशि का लेनदेन चेक, बैंक ड्राफ्ट या फिर बैंक खाते से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिये ही हो सकेगा।
नया प्रावधान 1 जून, 2015 से लागू होने वाला है। इस अवधि के बाद भी यदि कोई बड़ी राशि का लेन-देन नकद करता है तो उस पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
काले धन पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त विधेयक, 2015 में यह प्रावधान किया है। यह प्रावधान लागू होने में दो महीने से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियों में अभी से हलचल मची है।
50 फीसदी से अधिक ट्रांजैक्शन नकद
देश की एक अग्रणी रियल एस्टेट कंपनी के सीईओ से जब इस पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि, नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जून के बाद तो रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बुरे दिन आने ही वाले हैं।
उनके मुताबिक अभी इस क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा ट्रांजेक्शन तो नकद में ही होता है। जब ऐसे ग्राहक से चेक या ड्राफ्ट मांगेंगे तो उनका बिदकना तय है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि रियल एस्टेट में काला धन नहीं खपे और वहां काले धन का निर्माण भी नहीं हो, इसलिए आयकर कानून की धारा 269 एसएस में एक नया उपखंड जोड़ा जा रहा है।
इसके बाद 20000 रुपये से ऊपर की रकम का नकद में लेनदेन करना अवैध हो जाएगा। ऐसे भुगतान के लिए अकाउंट पेयी चेक/ ड्राफ्ट या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ही मान्य होगा।
इस तरह रखी जाएगी नजर
इस तरह के ट्रांजेक्शन को पकड़ने के लिए वित्त मंत्रालय की आर्थिक खुफिया इकाई (एफआईयू) के साथ साथ अन्य एजेंसियों की भी सहायता ली जाएगी।
बैंकों से तो आयकर विभाग का पहले से ही तालमेल है। अब उन्हें कहा जाएगा कि रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े लेन देन पर विशेष नजर रखें। सर्विस टैक्स विभाग से भी सूचनाओं के नियमित आदान-प्रदान का तंत्र विकसित किया जा रहा है।
ऐसा इसलिए क्योंकि रियल एस्टेट को सर्विस टैक्स के दायरे में पहले से ही लाया जा चुका है और उनके पास इस क्षेत्र की कंपनियों की जानकारी है।