केंद्र सरकार ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को और अधिकार देने के लिए सोमवार को प्रतिभूति बाजार कानूनों में संशोधन से जुड़ा एक विधेयक लोकसभा में पेश किया। इससे सेबी को फर्जी निवेश योजनाओं पर लगाम लगाने, किसी कंपनी से जांच से जुड़ी सूचनाएं हासिल करने और मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों के गठन के लिए ज्यादा अधिकार मिलेंगे।
वित्त राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रतिभूति कानून संशोधन विधेयक 2014, पेश किया। इस विधेयक से सेबी को कॉल डाटा रिकार्ड मंगाने जैसे अधिकार भी हासिल होंगे। यूपीए सरकार में पोंजी स्कीमों से निपटने के लिए सेबी को अधिकार संपन्न बनाने के मकसद से एक अध्यादेश तीन बार तैयार किया गया था लेकिन इसे संसद में पारित नहीं कराया जा सका था।
केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पेश करने के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि निवेशकों के हितों की रक्षा और प्रतिभूति बाजार के समुचित विकास के लिए सेबी के अधिकारों को बढ़ाना जरूरी हो गया है। यह विधेयक अधिनियम बन जाने के बाद सेबी को न सिर्फ प्रतिभूति बाजार से जुड़े व्यक्तियों व कंपनियों से सूचनाएं मांगने का अधिकार होगा बल्कि बाजार नियामक प्रतिभूति बाजार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े न होने वाले व्यक्तियों से भी सूचनाएं मांग सकेगा।
इसके अलावा बड़ी संख्या में लंबित मामलों के मद्देनजर प्रतिभूति कानूनों के तहत मामलों का निस्तारण तेजी से करने के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाना जरूरी है। विधेयक के मुताबिक 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक कोष वाली कोई भी गैर पंजीकृत स्कीम को कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम माना जाएगा।
नए लिस्टिंग नार्म्स 1 अक्तूबर से होंगे लागू
सेबी लिस्टेड कंपनियों के लिए नए कॉरपोरेट गवर्नेंस नार्म्स 1 अक्तूबर से लागू करेगा। सेबी प्रमुख यूके सिन्हा ने सोमवार को एक सम्मेलन से इतर पत्रकारों को बताया कि लिस्टिंग एग्रीमेंट रेगुलेशंस 1 अक्तूबर से लागू होंगे। सेबी ने इस वर्ष अप्रैल में लिस्टेड कंपनियों के लिए कॉरपोरेट गवर्नेंस नार्म्स जारी किए थे। इसमें माइनारिटी शेयर धारकों और विदेशी शेयरधारकों के साथ समान व्यहार सुनिश्चित करने, निवेशकों के हितों की रक्षा और डिस्क्लोजर को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं।