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बैंकों का नहीं चुकाया कर्ज तो अखबार में छपेगी फोटो

Fri, 19 Apr 2013 10:18 PM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/नई दिल्ली
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सार्वजनिक बैंकों का जान बूझकर कर्ज न चुकाना अब सामाजिक रूप से भी भारी पड़ सकता है। बैंक कर्ज वसूली के लिए सख्ती के कदम उठाने के साथ-साथ आपकी प्रतिष्ठा पर भी चोट करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए लिए वह मीडिया को प्रमुख जरिया बनाएंगे।
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भारतीय स्टेट बैंक की तरह अब सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे बैंक डिफॉल्टर की फोटो अखबारों में छपवाने का मन बना चुके हैं। बैंकर्स के अनुसार इसके अलावा वह रिकवरी के लिए भी सख्त कदम उठाएंगे, जिसके तहत गिरवी रखी गई संपत्ति को भी जब्त करने के कदमों में तेजी लाएंगे।

बैंक पहले भी डिफॉल्टरों के साथ इस तरह की सख्ती बरतने की तैयारी में थे लेकिन वह ऐसा नहीं कर पा रहे थे। अब जब वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों से अपना एनपीए घटाकर एक फीसदी तक लाने का निर्देश दिया है, तो बैंक रिकवरी के लिए ऐसे कदम उठाने का पूरा मन बना चुके हैं।
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पंजाब एंड सिंध बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक बैंकों को अपनी गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) एक फीसदी तक करने को कहा है।

ऐसे दौर में जब डिफॉल्ट बढ़ रहे हैं, तब कर्ज की वसूली के लिए कहीं ज्यादा सख्त कदम उठाने होंगे। उसी के तहत अब बैंक ऐसे डिफॉल्टरों की फोटो सार्वजनिक रूप से छपवाने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार स्टेट बैंक इसकी शुरुआत पहले ही कर चुका है। जिसके बेहतर परिणाम भी मिले हैं।

एक अन्य बैंक अधिकारी के अनुसार रिकवरी के तहत कुछ राज्यों में काफी सख्त कानून हैं। जैसे उत्तर प्रदेश के कानून के तहत रिकवरी महकमे में शिकायत दर्ज कराने पर बैंक के बदले में वह महकमा अपने स्तर पर कर्ज की वसूली करता है। जहां कर्ज न चुकाने पर जेल तक जाने का प्रावधान है। जिसके लिए बैंक को कुछ निश्चित राशि विभाग को देनी होती है। बैंक अब इस तरह के भी कदम उठा सकते हैं।

पंजाब नेशनल बैंक के एक अधिकारी के अनुसार डिफॉल्ट होने की स्थिति में बैंक पहले ऐसे ग्राहकों को पत्र के जरिए कर्ज चुकाने को सूचित करता है। अब अगर उसके बाद भी वह कर्ज नहीं चुका रहा है, तो वसूली के लिए दूसरे सख्त कदम उठाने होंगे।

बैंक क्यों हो रहे हैं सख्त
बैंकों के बढ़ते एनपीए से परेशान वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक बैंकों को मार्च 2014 तक अपने एनपीए को कुल दिए गए कर्ज के मुकाबले एक फीसदी तक लाने को कहा है। जबकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए दिसंबर 2012 तक 3.66 फीसदी तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों का एनपीए इस अवधि में 5.34 फीसदी तक पहुंच चुका है।

रिटेल लोन ग्राहकों पर होगा ज्यादा असर
होम लोन, ऑटो लोन के तहत होने वाले डिफॉल्टरों को बैंकों की सख्ती ज्यादा प्रभावित कर सकती है। पंजाब एंड सिंध बैंक के अधिकारी के अनुसार इस तरह के कर्ज में बैंक के पास घर या वाहन बंधक के रूप में होते हैं, जिससे वह इन्हें आसानी से जब्त कर सकेंगे।

कॉरपोरेट से कर्ज वसूला नहीं रहा है आसान
बैंकों के बढ़ते एनपीए में सबसे ज्यादा योगदान कॉरपोरेट सेक्टर का रहा है। लेकिन, किंगफिशर के मामले में जिस तरह से बैंकों को कर्ज की वसूली में दिक्कत आ रही है, उसे देखते हुए बैंकों के लिए कॉरपोरेट से कर्ज वसूलना आसान नहीं होगा।
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