देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के चलते कारपोरेट सेक्टर में विस्तार योजनाएं बीते महीनों ठंडी रही, जिसकी मार रीयल्टी सेक्टर पर भी पड़ी है। व्यावसायिक रीयल एस्टेट कारोबार सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। ऐसे में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद की नई किरण बताया गया है।
रिसर्च फर्म नाइट फ्रैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, सरकार द्वारा पिछले दिनों आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का क्रियान्वयन अभी शुरू नहीं हो पाया। आने वाले दिनों में भी इन चीजों को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं दिखाई दे रही है। जिसके चलते कारोबार और उद्योग जगत में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
नाइट फ्रैंक ने अपने अध्ययन में देश के मौजूदा व्यावसायिक रीयल्टी सहित कारोबारी परिदृश्य में कमजोरी और ग्लोबल आर्थिक हालात में अनिश्चितता बने रहने को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में इन वजहों के चलते निवेश और कारोबारी विस्तार की योजनाओं में ठंडापन बने रहने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा सेक्टर की सतत वृद्धि दर को अर्थव्यवस्था के लिए नई उम्मीद के रूप में बताया जा रहा है। 2008-11 से इन सेक्टरों की वृद्धि दर 5.9 फीसदी बनी हुई है। दूसरी ओर, आईटी सेक्टर में सुस्ती की स्थिति बनी रह सकती है।