लोकसभा द्वारा बैंकिंग संशोधन विधेयक को मंजूरी दिए जाने के विरोध में बैंक कर्मी 20 दिसंबर को हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल में ऑल इंडिया बैंक कर्मचारी एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन, बैंक कर्मचारी फेडरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल यूनियन ऑफ बैंक कर्मचारी संगठन शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को होने वाली इस हड़ताल में करीब पांच लाख कर्मचारियों के शामिल होने का दावा बैंक यूनियन कर रही हैं। हालांकि इस हड़ताल में नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्क्स शामिल नहीं हो रही है।
ऑल इंडिया बैंक कर्मचारी एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सीएच वेंकटचलम ने अमर उजाला को बताया कि बैंक संगठन सरकार द्वारा ला जा रहे नए बैंकिंग कानून का विरोध कर रहे हैं। सरकार के इस कदम से कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ ग्राहकों का भी नुकसान होगा। वेंकटचलम के अनुसार नए कानून में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निवेशकों के वोटिंग अधिकार को 10 फीसदी और निजी क्षेत्र के बैंकों में वोटिंग अधिकार 26 फीसदी करने का प्रस्ताव है।
इसके लागू होने से बैंकों में खास तौर से निजी निवेशकों का हस्तक्षेप बढ़ेगा और वह बैंकिंग कारोबार को केवल लाभ की नजर से देखेंगे। जिसकी वजह से जमा दरों में कमी, कर्ज के महंगे करने का दबाव रहेगा। साथ ही कर्मचारियों पर भी नकारात्मक असर होगा। इसे देखते हुए 20 दिसंबर को करीब पांच लाख बैंक कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, पुरानी पीढ़ी वाले निजी बैंक और विदेशी बैंक शामिल होंगे।
नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्क्स के जनरल सेक्रेटरी अश्वनी राणा के अनुसार संगठन सरकार द्वारा लाए जा रहे नए बैंकिंग कानून का विरोध कर रहा है। इसका बैंकिंग सेक्टर पर नकारात्मक असर होगा। हालांकि संगठन 20 दिसंबर को होने वाली हड़ताल में शामिल नहीं हो रहा है।