ब्रिटेन ने भारत के ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं में मदद करने की अपनी योजना के तहत बंगलूरू मुंबई औद्योगिक गलियारे के निर्माण में सहयोग करने की घोषणा की है।
भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और वित्तीय मामले के सातवें दौर की मंत्री स्तरीय वार्ता के बाद आज यहां जारी संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में ब्रिटेन का यूके एक्जिम फाइनेंस एक अरब पाउंड का कर्ज देगा। यह विशेष रूप से बंगलूरू-मुंबई औद्योगिक गलियारे के लिए होगा।
ब्रिटेन का यह संस्थान ग्लोबल स्तर के 10 बैंकों के जरिये तीन अरब पाउंड का कर्ज उपलब्ध कराने पर विचार-विर्मश कर रहा है, जिसमें एक अरब पाउंड का लाइन ऑफ क्रेडिट भी शामिल है। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किया, जबकि ब्रिटेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के वित्त मंत्री जार्ज ओसबोर्न ने किया। ब्रिटेन के दल में केबिनेट कार्यालय में सरकारी नीति के लिए राज्यमंत्री ओलीवर लेटविन भी मौजूद थे।
वार्ता के दौरान अन्य मुद्दों के अलावा मुख्य रूप से वृहद आर्थिक जोखिमों और नीतिगत उपायों पर चर्चा की गई। इसके अलावा आधारभूत सुविधाओं के वित्त पोषण और व्यापार व निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया।
दोनों देशों के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों के बीच 20 सितंबर 2004 को हस्ताक्षर किए गए संयुक्त घोषणापत्र के अनुसार चार फरवरी 2005 को भारत ब्रिटेन आर्थिक और वित्तीय वार्ता की आधिकारिक तौर पर शुरुआत की गई थी। इस वार्ता में ब्रिटेन और भारत में बारी-बारी से वार्षिक मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकें आयोजित की जाती हैं।