अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा नहीं बढ़तीं, तो वर्तमान वित्त वर्ष में ईंधनों पर तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजल का बाजार मूल्य और भारत सरकार द्वारा तय मूल्य में अंतर जिस रफ्तार से कम हो रहा है, उससे तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी में कमी आएगी।
एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां कैसी रहती हैं, अंडर रिकवरी का बोझ किस तरह बांटा जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का क्या रुख रहता है, यह सभी कारक अंडर रिकवरी को प्रभावित करेंगे।