राज्यों में विमानन सुविधा को बढ़ावा देने की होड़ क्या शुरू हुई है, खास आदमी के उपयोग में आने वाले हवाई जहाज का ईंधन (एटीएफ) सस्ता बिकने लगा है।
वहीं दूसरी ओर बस-ट्रक और किसानों के पंपिंग सेट का ईंधन डीजल मंहगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बीते वर्ष जून के औसत 110 डॉलर प्रति बैरल की कीमत के मुकाबले इस समय 50 डॉलर के आसपास पहुंच गई है।
इसके फलस्वरूप सभी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घटी हैं। बीते 31 जनवरी की आधी रात को एटीएफ की कीमतों में रिकार्ड 11.3 फीसदी की कटौती की गई थी, जबकि 3/4 जनवरी की आधी रात से डीजल करीब सवा दो रुपये सस्ती हो गया है।
इसके बावजूद मुंबई और कुछ अन्य स्थानों पर एटीएफ अभी भी डीजल से सस्ता है। दिल्ली में भी डीजल की कीमत एटीएफ के मुकाबले प्रति लीटर सिर्फ 50 पैसे ही कम है।
9-24 फीसदी वैट
देश में पेट्रोलियम पदार्थों के सबसे बड़े वितरक इंडियन ऑयल के एक अधिकारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि डीजल या पेट्रोल पर केन्द्र सरकार के तो जो टैक्स हैं, वे हैं ही, राज्य सरकार भी 9 से 24 फीसदी तक वैट वसूलती है। जबकि एटीएफ पर अधिकतर राज्यों में चार-पांच फीसदी का वैट है। इसलिए डीजल इस समय एटीएफ से महंगा हो गया है।
उदाहरण के लिए देखें तो इस समय मुंबई में प्रति लीटर डीजल की कीमत 52.99 रुपये है, जबकि एटीएफ प्रति लीटर 47.69 रुपये है। दिल्ली में डीजल के 46.01 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले एटीएफ 46.51 रुपये प्रति लीटर है, जो कि मामूली महंगा है।
जानें अन्य राज्यों की हालत
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी बताते हैं कि आंध्र प्रदेश में एटीएफ पर तो 1 फीसदी का वैट है, जबकि डीजल पर वह 22.25 फीसदी का वैट लगाता है।
इसी तरह चंडीगढ़ में एटीएफ पर वैट 4 फीसदी है, जबकि डीजल पर 12.52 फीसदी, उत्तर प्रदेश में एटीएफ पर 4 फीसदी वैट जबकि डीजल पर 17.48 फीसदी वैट है। इसलिए डीजल तो वैट से महंगा होगा ही होगा।
वैसे देश में डीजल पर सबसे कम वैट हरियाणा लेता है। जो कि महज 9.24 फीसदी है। लेकिन वहां कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं होने की वजह से एटीएफ की कीमत जाहिर नहीं की गई है। इसलिए इसकी तुलना नहीं हो सकती है।