लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सहयोगी दलों की करारी हार के बावजूद यूपीए सरकार के कुछ सलाहकार मोदी सरकार में भी अहम जगह पाने में कामयाब हो सकते हैं।
इस कड़ी में सबसे प्रमुख नाम केंद्रीय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के अध्यक्ष रहे अशोक गुलाटी का चल रहा है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरएसएस और स्वदेशी आंदोलन की पृष्ठ भूमि से जुड़े विशेषज्ञों को दरकिनार कर मुक्त बाजार के समर्थक अशोक गुलाटी योजना आयोग या कृषि मंत्रालय में कोई बड़ी भूमिका मिल सकती है।
यूपीए सरकार में अहम पद पर होने के बावजूद अशोक गुलाटी के नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध रहे हैं।
गुजरात की अर्थव्यवस्था का किया था समर्थन
गुलाटी ने गुजरात में कृषि क्षेत्र की विकास दर दो दशक में 3.3 फीसदी से बढ़कर 11.1 फीसदी होने का पुरजोर तरीके से समर्थन किया था। वर्ष 2009 में गुलाटी ने गुजरात के विभिन्न जिलों में कृषि की स्थिति का अध्ययन करने के बाद एक रिपोर्ट बनाई थी। इस रिपोर्ट से मोदी के गुजरात मॉडल के दावों को काफी बल मिला था।
हालंकि इन आंकड़ों को लेकर अर्थशास्त्रियों में काफी मतभेद हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी ने पिछले विधानसभा चुनाव के प्रचार में गुलाटी की रिपोर्ट का भरपूर इस्तेमाल किया।
अशोक गुलाटी के इसी गुजराती और मोदी कनेक्शन की वजह से केंद्र की नई सरकार में उनकी जगह पक्की मानी जा रही है। टीम मोदी से जुड़े कुछ जानकार उनके कृषि राज्यमंत्री की दौड़ में होने का दावा कर रहे हैं। जबकि योजना आयोग या सीएसीपी में उनकी एंट्री की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
गुलाटी के खिलाफ लामबंदी शुरू
गुलाटी के पक्ष में संभावनाएं बनते देख भाजपा और संघ से जुड़े विशेषज्ञों ने उनके खिलाफ लामबंद होना शुरू कर दिया है। हाल ही में गुलाटी ने महंगाई कम करने के लिए फल, सब्जियों और डेयरी उत्पादों की इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की वकालत की है।
इस पर कृषि नीति के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने ट्वीट किया है कि यही मांग यूरोपीय संघ के देश लंबे समय से करते आ रहे हैं। क्या गुलाटी यूरोप के प्रतिनिधि हैं?